By: Vikash Mala Mandal
देवघर: झारखंड के देवघर जिले में निजी विद्यालयों द्वारा वसूली जा रही मनमानी फीस को लेकर अब जनप्रतिनिधि भी खुलकर सामने आने लगे हैं। देवघर नगर निगम के मेयर रवि राउत ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जिला उपायुक्त को एक औपचारिक आवेदन सौंपा है। आवेदन में निजी स्कूलों द्वारा ली जा रही वार्षिक फीस और री-एडमिशन फीस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

मेयर द्वारा सौंपे गए आवेदन में कहा गया है कि देवघर नगर क्षेत्र में कई मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जहां हजारों छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन इन स्कूलों द्वारा प्रत्येक नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में छात्रों से वार्षिक शुल्क के अलावा री-एडमिशन फीस भी वसूली जाती है, जो पूरी तरह से अनुचित और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला है।
रवि राउत ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि एक बार जब किसी छात्र का किसी विद्यालय में नामांकन हो जाता है, तो हर वर्ष उससे दोबारा एडमिशन फीस लेना नियमसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि यह प्रथा शिक्षा के अधिकार और समान अवसर की भावना के खिलाफ है।

उन्होंने यह भी बताया कि देवघर जैसे शहर में बड़ी संख्या में मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवार रहते हैं, जिनके लिए इस तरह की अतिरिक्त फीस का भुगतान करना बेहद कठिन होता है। कई परिवार आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
मेयर ने अपने आवेदन में राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों का भी हवाला दिया है, जिसमें निजी विद्यालयों को इस प्रकार की फीस वसूली पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद देवघर में इन निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि झारखंड के कुछ अन्य जिलों जैसे गढ़वा और पलामू में जिला प्रशासन द्वारा इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निजी विद्यालयों की फीस संरचना पर नियंत्रण के लिए कदम उठाए गए हैं। ऐसे में देवघर में भी इसी तरह की कार्रवाई की आवश्यकता है।
मेयर रवि राउत ने उपायुक्त से मांग की है कि इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप करते हुए निजी विद्यालयों को मनमानी फीस वसूली से रोका जाए। साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालय प्रबंधन, अभिभावकों और जिला प्रशासन के बीच एक समन्वय समिति बनाई जाए, जो फीस से जुड़े मुद्दों का समाधान पारदर्शी तरीके से कर सके।

इस पूरे मामले को लेकर शहर के अभिभावकों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों द्वारा हर साल अलग-अलग नामों से फीस ली जाती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि निजी विद्यालयों की फीस संरचना में पारदर्शिता लाना बेहद जरूरी है। यदि सरकार और प्रशासन द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएं और उनका सख्ती से पालन कराया जाए, तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

देवघर में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह जरूरी है कि प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम उठाए। मेयर द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल अभिभावकों की आवाज को मजबूती देता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस आवेदन पर क्या कार्रवाई करता है और निजी विद्यालयों की फीस को लेकर क्या नई गाइडलाइन जारी की जाती है। फिलहाल, पूरे जिले में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है और अभिभावकों को प्रशासन के फैसले का इंतजार है।

