

रांची। झारखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ (JRPS) ने राज्य सरकार से शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने और वर्षों से लंबित पड़े स्थायी नियोजन को लेकर महत्वपूर्ण माँगें रखीं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी माँगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो वे राज्यव्यापी आंदोलन को बाध्य होंगे।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री … (नाम) की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में झारखंड के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य एजेंडा उन हजारों प्रशिक्षित और TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास अभ्यर्थियों की स्थिति था, जिन्हें अब तक स्थायी शिक्षक के रूप में नियुक्त नहीं किया गया है।
लंबे समय से लंबित नियुक्ति पर नाराजगी
संघ के नेताओं ने बताया कि वर्ष 2012 से अब तक कई बार सरकारों ने प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया, लेकिन जमीन पर कोई ठोस परिणाम नहीं दिखा। प्रशिक्षित शिक्षक लगातार बेरोजगारी झेल रहे हैं। इनमें से कई शिक्षक 10 से 15 वर्षों से तैयारी कर रहे हैं और अब उनकी आयु भी सरकारी नौकरी की अधिकतम सीमा के करीब पहुँच चुकी है।
राज्य सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
संघ ने राज्य सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि RTE Act 2009 के प्रावधानों के अनुसार सभी सरकारी विद्यालयों में प्रशिक्षित और पात्र शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है। परंतु सरकार की सुस्ती के कारण न तो छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पा रही है और न ही प्रशिक्षित शिक्षक अपनी योग्यता के अनुरूप कार्य कर पा रहे हैं।
संघ का कहना है कि राज्य के विभिन्न सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान समय में लगभग 35,000 से अधिक शिक्षकों की कमी है। इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।
कोर्ट के आदेशों का हवाला
नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि दोनों अदालतें साफ कर चुकी हैं कि योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति में किसी प्रकार की देरी शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। इसके बावजूद विभाग द्वारा नियोजन प्रक्रिया को टालना छात्रों और अभ्यर्थियों दोनों के साथ अन्याय है।
संघ की प्रमुख माँगें
बैठक के बाद संघ ने लिखित प्रस्ताव जारी करते हुए सरकार से निम्नलिखित प्रमुख माँगों पर तत्काल कार्रवाई की अपील की—
1. 2000 से 2008 के बीच प्रशिक्षित सभी प्राथमिक शिक्षकों का शीघ्र नियोजन किया जाए।
2. 2009 से 2025 तक प्रशिक्षित एवं TET पास सभी अभ्यर्थियों को प्राथमिक शिक्षक के पद पर स्थायी नियुक्ति दी जाए।
3. सभी जिलों में रिक्त पड़े लगभग 35,000 पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
4. शिक्षकों की सेवानिवृत्ति से उत्पन्न हो रही रिक्तियों को भरने के लिए एक पारदर्शी और वार्षिक भर्ती कैलेंडर तैयार किया जाए।
आंदोलन की चेतावनी
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार आने वाले कुछ हफ्तों में कोई ठोस रोडमैप जारी नहीं करती, तो झारखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ राज्यव्यापी आंदोलन करेगा। इसमें राजधानी रांची सहित सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन और चरणबद्ध धरना-प्रदर्शन शामिल होंगे।
शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव
संघ ने चेताया कि यदि स्थायी नियुक्ति में देरी होती रही, तो झारखंड की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। वर्तमान में अधिकांश स्कूलों में अतिथि शिक्षक और अस्थायी कर्मियों पर निर्भरता बढ़ रही है। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि बच्चों का शैक्षणिक भविष्य भी खतरे में है।
विपक्ष का समर्थन
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी संघ की माँगों का समर्थन किया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा सुनिश्चित हो सके।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस बीच, शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि वे संघ की माँगों को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द ही इस पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर निर्णय लिया जाएगा। हालाँकि अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक लिखित बयान नहीं आया है।
झारखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि उनकी लड़ाई केवल अपनी नौकरी के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।



