
नई दिल्ली/पटना। राजधानी दिल्ली और बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को छात्र-छात्राओं ने कर्मचारी चयन आयोग (SSC) भर्ती परीक्षा को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में लगातार अनियमितताएं सामने आ रही हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों ने नारेबाजी की और कहा कि “परीक्षा कराना ही काफी नहीं है, पारदर्शिता और समय पर रिजल्ट आना भी जरूरी है।”
छात्रों का आक्रोश
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और विभिन्न कोचिंग संस्थानों से आए छात्रों ने संसद मार्ग पर प्रदर्शन किया। वहीं, पटना के गाँधी मैदान और कारगिल चौक पर हजारों छात्र सड़क पर उतर आए।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि
SSC की परीक्षाओं का कैलेंडर समय पर जारी नहीं होता।
कई बार पेपर लीक होने की खबरें आती हैं।
रिजल्ट घोषित होने में लंबा विलंब होता है।
रिक्त पदों पर भर्तियां पारदर्शी तरीके से नहीं होतीं।
छात्रों की मांगें
छात्रों ने सरकार और SSC से कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिनमें शामिल हैं –
1. परीक्षा प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाई जाए।
2. पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाए जाएं।
3. भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध किया जाए।
4. लंबित परिणामों को जल्द घोषित किया जाए।
5. आयोग की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए स्वतंत्र निकाय बनाया जाए।
पुलिस और प्रशासन की सख्ती
दिल्ली में संसद मार्ग और पटना में मुख्य सड़कों पर पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। कई जगह पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। कुछ छात्रों को हिरासत में भी लिया गया।
हालांकि छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वे केवल अपनी आवाज सरकार तक पहुँचाना चाहते हैं।
सोशल मीडिया पर गूंज
SSC की भर्ती परीक्षा में खामियों को लेकर छात्रों का यह विरोध सोशल मीडिया पर भी छा गया। ट्विटर (अब X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #SSCProtest, #SSCStudents और #StopExamIrregularities जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
हजारों छात्रों ने अपनी समस्याएं वीडियो और पोस्ट के जरिए साझा कीं और सरकार से न्याय की गुहार लगाई।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि SSC जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पारदर्शिता का होना बेहद जरूरी है।
प्रो. अरुण कुमार (DU) का कहना है – “भर्ती परीक्षाओं में देरी से युवाओं में असंतोष बढ़ता है। सरकार को तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे।”
करियर काउंसलर सीमा सिंह कहती हैं – “आज की युवा पीढ़ी मेहनत करती है, लेकिन प्रक्रिया में खामियां उनके भविष्य को प्रभावित कर रही हैं। आयोग को विश्वास बहाल करने के लिए ठोस सुधार करने चाहिए।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाया है। उनका कहना है कि सरकार युवाओं से रोजगार के वादे करती है, लेकिन भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ी से छात्रों का भविष्य अधर में लटक जाता है।
कांग्रेस, राजद और आप नेताओं ने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं, सत्ताधारी दल का कहना है कि छात्रों की समस्याओं पर ध्यान दिया जाएगा और जल्द ही आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार होगा।
आंदोलन का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह आंदोलन लंबा खिंचता है तो इसका असर पूरे देश में देखने को मिल सकता है। क्योंकि SSC परीक्षा केवल दिल्ली और बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम है।
हजारों छात्र हर साल SSC की विभिन्न परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में उनकी नाराजगी सरकार और आयोग के लिए बड़ा संकेत है।
दिल्ली और पटना में हुए छात्र प्रदर्शनों ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत में भर्ती प्रक्रियाएं युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने में सक्षम हैं? छात्रों का कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
सरकार और SSC के सामने अब यह बड़ी चुनौती है कि वह कैसे छात्रों का विश्वास जीतते हुए पारदर्शिता और रोजगार की गारंटी सुनिश्चित करे

