देवघर | धार्मिक संवाददाता
देवाधिदेव महादेव बाबा भोलेनाथ के मंदिर में शुक्रवार की शाम आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब मंदिर स्टेट की ओर से बाबा भोलेनाथ का भव्य तिलकोत्सव आयोजित किया गया। परंपरा के अनुसार यह तिलकोत्सव लक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रांगण में संध्या लगभग 7:30 बजे विधिवत रूप से संपन्न हुआ।

इस पावन अवसर पर आचार्य श्रीनाथ पंडित, मंदिर के सरदार पांडा गुलाब नंद ओझा एवं मंदिर उपचारक भक्ति नाथ फलहारी की गरिमामयी उपस्थिति में बाबा भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गई। तिलकोत्सव का यह आयोजन फाल्गुन मास में आने वाली महाशिवरात्रि से पूर्व बाबा के विवाह की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
पंचोपचार विधि से हुआ बाबा का तिलक
तिलकोत्सव के दौरान बाबा भोलेनाथ का पंचोपचार विधि से विधिवत तिलक किया गया। इस दौरान बाबा को आम्र मंजरी, अबीर, पंचमेवा, फल, वस्त्र, इत्र आदि अर्पित किए गए। विशेष रूप से बाबा को मालपुआ का भोग लगाया गया, जो इस तिलकोत्सव की प्रमुख पहचान है।
पूजन के उपरांत सरदार पांडा गुलाब नंद ओझा अबीर लेकर बाबा मंदिर के गर्भगृह में पहुंचे, जहां बाबा भोलेनाथ को फुलेल अर्पित करने के पश्चात तिलक स्वरूप अबीर अर्पित किया गया। इसके बाद बाबा का भव्य श्रृंगार किया गया, जिससे मंदिर परिसर भक्तिरस में डूब गया।

22 मंदिरों में भी लगाया गया भोग
पूजा-अर्चना के बाद पुजारियों द्वारा बाबा मंदिर परिसर स्थित सभी 22 मंदिरों में धूप-दीप दिखाकर मालपुआ का भोग लगाया गया, जिससे पूरा परिसर शिवमय हो उठा। मंदिर में शंखनाद, मंत्रोच्चार और “हर हर महादेव” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बन गया।
श्रद्धालुओं का मानना है कि तिलकोत्सव से महाशिवरात्रि तक बाबा का यह विशेष श्रृंगार और भोग परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जो बाबा और मां पार्वती के विवाह की तैयारी का प्रतीक है।
फाल्गुन पूर्णिमा तक प्रतिदिन लगेगा अबीर और मालपुआ का भोग
मंदिर प्रशासन के अनुसार अब फाल्गुन पूर्णिमा तक प्रतिदिन बाबा की पूजा में अबीर एवं मालपुआ का भोग लगाया जाएगा। यह परंपरा पूरे 23 दिनों तक चलेगी, जिसके बाद फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि यानी महाशिवरात्रि को बाबा भोलेनाथ एवं माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न होगा।
इस अवसर को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं, जिससे पूरा शहर शिवभक्ति में रंग जाता है।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भारी भीड़
तिलकोत्सव की इस पावन परंपरा को देखने के लिए शुक्रवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहे। जैसे ही बाबा का तिलक संपन्न हुआ, भक्तों द्वारा जोरदार “हर हर महादेव” और “माता पार्वती की जय” के नारे लगाए गए।
श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा के तिलकोत्सव के दर्शन मात्र से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि हर वर्ष इस आयोजन में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
बाबा भोलेनाथ का तिलकोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि यह झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और आस्था का प्रतीक भी है। देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां होने वाले प्रत्येक अनुष्ठान का विशेष महत्व होता है।
तिलकोत्सव के साथ ही शिव विवाह की तैयारियां शुरू हो जाती हैं, जिसमें शहर और आसपास के क्षेत्रों में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है।
श्रद्धालुओं से प्रशासन की अपील
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दर्शन के दौरान शांति बनाए रखें और मंदिर की परंपराओं का पालन करें, ताकि सभी भक्त सुचारु रूप से बाबा भोलेनाथ के दर्शन कर सकें।
निष्कर्ष
बाबा भोलेनाथ का तिलकोत्सव एक बार फिर देवघर की धार्मिक परंपराओं को जीवंत करता नजर आया। आने वाले दिनों में अबीर, गुलाल और मालपुआ की खुशबू से पूरा देवघर शिवमय बना रहेगा और महाशिवरात्रि पर बाबा एवं मां पार्वती का दिव्य विवाह इस आस्था के पर्व को शिखर पर पहुंचाएगा।

