By: Vikash Mala Mandal
जून 2026 से अंतरराष्ट्रीय स्तर की अंग्रेजी दक्षता परीक्षा IELTS में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। यह बदलाव परीक्षा की संरचना से लेकर परीक्षा प्रक्रिया तक कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रभाव डालेंगे। दुनिया भर में लाखों छात्र हर वर्ष IELTS परीक्षा देते हैं और ऐसे में नई व्यवस्था उनके लिए परीक्षा को और अधिक लचीला, पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

नए नियमों के अनुसार, जून 2026 से IELTS परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित प्रारूप में आयोजित की जाएगी। यानी अब पढ़ने, सुनने और बोलने से जुड़े तीनों सेक्शन केवल कंप्यूटर मोड में ही होंगे। हालांकि, उम्मीदवारों की सुविधा को देखते हुए लेखन (Writing) सेक्शन के लिए पेन-पेपर का विकल्प जारी रहेगा। इस कदम का उद्देश्य छात्रों को तकनीक-आधारित परीक्षा का आधुनिक अनुभव देना है, साथ ही उन विद्यार्थियों को भी राहत देना है जो लेखन हाथ से करना पसंद करते हैं।

कंप्यूटर आधारित परीक्षा क्यों?
IELTS प्रबंधन के अनुसार, दुनिया तेज़ी से डिजिटल होती जा रही है और परीक्षा प्रक्रियाओं में तकनीक का उपयोग तत्काल आवश्यकता बन चुका है। कंप्यूटर आधारित परीक्षा से न केवल टेस्ट की गति बढ़ेगी बल्कि परिणाम भी पहले की तुलना में कम समय में जारी किए जा सकेंगे। कंप्यूटर आधारित टेस्ट में त्रुटि की संभावना कम होती है और यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार अधिक निष्पक्ष माना जाता है।

कई छात्र कंप्यूटर पर टाइपिंग में अधिक सहज महसूस करते हैं। रीडिंग और लिसनिंग दोनों में कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रश्नों को बेहतर तरीके से व्यवस्थित देखा जा सकता है और समय प्रबंधन भी आसान हो जाता है। यही कारण है कि IELTS ने इस मोड को भविष्य की आवश्यकता मानते हुए इसे अनिवार्य बनाने का फैसला किया है।
सबसे बड़ा बदलाव – एक सेक्शन दोबारा देने की सुविधा
नए नियमों में सबसे महत्वपूर्ण और छात्रों के लिए सबसे लाभदायक बदलाव यह है कि अब किसी एक सेक्शन में कम अंक आने पर पूरी परीक्षा फिर से नहीं देनी पड़ेगी। उम्मीदवार 60 दिनों के भीतर केवल वही सेक्शन दोबारा दे सकेंगे जिसमें उनका स्कोर कम आया है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी उम्मीदवार ने Listening, Reading और Speaking में अच्छा स्कोर किया, लेकिन Writing में कम अंक मिले, तो उसे केवल Writing सेक्शन को ही दोबारा देने की अनुमति होगी। यह सुविधा छात्रों का समय, प्रयास और परीक्षा शुल्क—दोनों बचाएगी।
IELTS प्रबंधन का कहना है कि यह बदलाव परीक्षा को अधिक लचीला और छात्रों के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से किया गया है। अब उम्मीदवार छोटे से गलती के कारण पूरी परीक्षा दोबारा देने के बोझ से मुक्त होंगे।

लेखन के लिए पेन-पेपर का विकल्प क्यों रखा गया?
हालांकि परीक्षा का अधिकतर हिस्सा कंप्यूटर आधारित होगा, लेकिन Writing सेक्शन के लिए पेन-पेपर का विकल्प इसलिए रखा गया है क्योंकि कई देशों में अभी भी छात्र पारंपरिक लेखन में अधिक सहज हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हाथ से लिखने पर विचारों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है और अनेक विद्यार्थियों के लिए पेन-पेपर मोड अधिक स्वाभाविक है।
साथ ही, कई विश्वविद्यालय तथा इमिग्रेशन विभाग पेन-पेपर आधारित Writing को अधिक विश्वसनीय मानते हैं। इसलिए IELTS ने इस विकल्प को समाप्त करने के बजाय जारी रखने का फैसला किया है।

नई सिस्टम से छात्रों को क्या लाभ होंगे?
1. समय की बचत – अब केवल कमजोर सेक्शन को दोबारा देना होगा।
2. परीक्षा शुल्क में कमी – पूरे टेस्ट की फीस की बजाय केवल एक सेक्शन की फीस देनी होगी।
3. कम तनाव – उम्मीदवारों पर परीक्षा दोबारा देने का दबाव कम होगा।
4. तेज़ रिजल्ट – कंप्यूटर आधारित टेस्ट का परिणाम पहले की तुलना में जल्दी आएगा।
5. लचीलापन – छात्र अपनी उपलब्धता के अनुसार परीक्षा स्लॉट चुन सकेंगे।
क्या बदल नहीं रहा?
Speaking टेस्ट अभी भी इंसान के साथ सामने बैठकर ही लिया जाएगा।
परीक्षा के स्कोरिंग सिस्टम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
बैंड स्कोर की वैधता 2 साल ही रहेगी।
विश्व भर की यूनिवर्सिटीज़ में स्कोर पूर्व की तरह मान्य रहेगा।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव परीक्षा प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक मानकीकृत बना देगा। तकनीक आधारित परीक्षा छात्रों की क्षमताओं को बेहतर रूप से जांचने में मदद करती है। वहीं सेक्शन-रीटेस्ट की सुविधा छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है।
कई कोचिंग संस्थानों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनके अनुसार यह बदलाव परीक्षा को कम तनावपूर्ण और अधिक उपयोगी बना देगा।

छात्रों को कैसे तैयारी करनी चाहिए?
IELTS के नए प्रारूप को देखते हुए छात्रों को कंप्यूटर आधारित टेस्ट की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
कंप्यूटर पर रीडिंग की प्रैक्टिस करें
स्क्रीन पर लिसनिंग नोट्स बनाने की आदत डालें
टाइपिंग स्पीड सुधारें
कंप्यूटर बेस्ड IELTS मॉक टेस्ट दें
Writing के लिए दोनों तरीकों — टाइपिंग और पेन-पेपर — की तैयारी करें
IELTS परीक्षा में जून 2026 से होने वाले ये बदलाव न सिर्फ परीक्षा को आधुनिक बनाते हैं बल्कि छात्रों को काफी राहत भी देंगे। सेक्शन-रीटेस्ट की नई सुविधा से लाखों उम्मीदवारों को फायदा होगा। तकनीक आधारित परीक्षा से पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेंगी। शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञ और छात्र इसे एक सकारात्मक सुधार के रूप में देख रहे हैं।
यह बदलाव आने वाले वर्षों में परीक्षा प्रणाली को और अधिक अनुकूल, सरल और प्रभावी बनाएंगे। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे इस नई प्रणाली को समझकर तैयारी शुरू कर दें, ताकि वे आने वाले समय में बिना किसी मुश्किल के परीक्षा में सफल हो सकें।
