By: Vikash Kumar( Vicky )
आर्थिक मोर्चे पर भारत के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 7.4 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की जा सकती है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।

वैश्विक स्तर पर जहां मंदी, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं, वहीं भारत की अर्थव्यवस्था का इस तरह तेज गति से आगे बढ़ना निवेशकों, उद्योग जगत और आम जनता के लिए भरोसे का संकेत है।
सरकार के शुरुआती अनुमान क्या कहते हैं?
केंद्र सरकार के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, FY26 में आर्थिक गतिविधियों में निरंतर मजबूती देखने को मिलेगी। घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत खर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार GDP ग्रोथ को सहारा देगी।
सरकार का मानना है कि बीते कुछ वर्षों में किए गए संरचनात्मक सुधार—जैसे GST, IBC, डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा और ‘मेक इन इंडिया’—का सकारात्मक असर अब पूरी तरह से दिखने लगा है।
किन सेक्टरों से मिलेगी GDP को मजबूती?
1. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर:
‘मेक इन इंडिया’ और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं के चलते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मा और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ने से GDP को सीधा फायदा मिलेगा।
2. सर्विस सेक्टर:
आईटी, फाइनेंस, टूरिज्म और रिटेल जैसे सर्विस सेक्टर भारत की GDP का बड़ा हिस्सा हैं। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और वैश्विक आउटसोर्सिंग की मांग बढ़ने से इस सेक्टर में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है।
3. कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था:
अच्छे मानसून, सरकारी समर्थन योजनाओं और कृषि सुधारों से ग्रामीण मांग में सुधार हो सकता है, जो समग्र आर्थिक वृद्धि को सहारा देगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स का बड़ा रोल
सरकार लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दे रही है। सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट, पोर्ट और लॉजिस्टिक्स में भारी निवेश से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि लॉन्ग टर्म ग्रोथ को भी मजबूती मिलेगी। FY26 में भी सरकार के पूंजीगत व्यय (Capex) को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की संभावना है, जो GDP ग्रोथ का अहम इंजन बनेगा।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूत स्थिति
जहां अमेरिका और यूरोप की अर्थव्यवस्थाएं धीमी वृद्धि से जूझ रही हैं, वहीं भारत की घरेलू मांग उसे वैश्विक झटकों से काफी हद तक बचा रही है। चीन की ग्रोथ में सुस्ती के बीच भारत विदेशी निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनकर उभर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक स्थिरता, मजबूत नीतिगत ढांचा और युवा आबादी भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं।
महंगाई और ब्याज दरों का असर
GDP ग्रोथ के लिए महंगाई और ब्याज दरें अहम भूमिका निभाती हैं। अगर महंगाई नियंत्रण में रहती है और रिजर्व बैंक संतुलित मौद्रिक नीति अपनाता है, तो निवेश और खपत दोनों को बढ़ावा मिलेगा। इससे 7.4% ग्रोथ का लक्ष्य हासिल करना आसान हो सकता है।
आम जनता और रोजगार पर क्या असर पड़ेगा?
तेज GDP ग्रोथ का सीधा फायदा रोजगार सृजन और आय में बढ़ोतरी के रूप में दिख सकता है। नए उद्योग, स्टार्टअप्स और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से युवाओं के लिए नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे। इसके अलावा, सरकार की सामाजिक और कल्याणकारी योजनाओं के लिए भी अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे।
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 7.4% की अनुमानित GDP ग्रोथ भारत की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है, लेकिन इसके लिए नीतिगत निरंतरता और वैश्विक जोखिमों पर सतर्क नजर जरूरी है। अगर सुधारों की रफ्तार बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारत 8% या उससे अधिक की ग्रोथ भी हासिल कर सकता है। कुल मिलाकर, 2026 में भारत की GDP के 7.4% की दर से बढ़ने का अनुमान देश के आर्थिक भविष्य के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। मजबूत घरेलू मांग, सरकारी निवेश, निजी क्षेत्र की भागीदारी और वैश्विक स्तर पर बढ़ती भारत की साख इस ग्रोथ को संभव बना सकती है।
अगर हालात अनुकूल रहे, तो भारत न केवल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा, बल्कि विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भी एक और मजबूत कदम आगे बढ़ाएगा।

