By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर बच्चों की बढ़ती लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े खतरों को लेकर अब वैश्विक स्तर पर सख्ती की तैयारी तेज हो गई है। हाल ही में इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साझा मंच पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि फ्रांस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर बैन लगाने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। मैक्रों की इस पहल के बाद भारत में भी यह सवाल तेज हो गया है कि क्या यहां भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Facebook और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है?

फ्रांस का सख्त कदम: क्या है पूरी योजना?
फ्रांस सरकार का मानना है कि कम उम्र में सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों के मानसिक विकास, आत्मविश्वास और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। मैक्रों ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। फ्रांस में प्रस्तावित कानून के तहत 15 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अकाउंट बनाने से रोका जाएगा। इसके लिए आयु सत्यापन (Age Verification) की सख्त व्यवस्था लागू की जाएगी। मैक्रों ने भारत समेत अन्य देशों से भी अपील की है कि वे बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर ठोस नीति बनाएं।

भारत में क्या हैं मौजूदा नियम?
भारत में फिलहाल बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, भारत सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आईटी नियमों के तहत कई सख्त प्रावधान लागू किए हैं।
13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अधिकांश प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने की अनुमति नहीं होती।
माता-पिता की सहमति और डेटा सुरक्षा को लेकर दिशानिर्देश मौजूद हैं।
साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण और अश्लील सामग्री के खिलाफ कड़े कानून लागू हैं।
इसके बावजूद, आयु सत्यापन की प्रक्रिया कमजोर होने के कारण कम उम्र के बच्चे आसानी से फर्जी जानकारी देकर अकाउंट बना लेते हैं।

क्यों उठी बैन की मांग?
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में सोशल मीडिया की लत के कारण:
पढ़ाई पर असर
नींद में कमी
अवसाद और चिंता की समस्या
साइबर बुलिंग का खतरा
गलत कंटेंट के संपर्क में आने का जोखिम
विश्व स्वास्थ्य संगठनों और मनोवैज्ञानिकों ने भी समय-समय पर डिजिटल एक्सपोजर सीमित करने की सलाह दी है।
भारत में भी कई अभिभावक और शिक्षाविद सोशल मीडिया पर उम्र सीमा बढ़ाने की मांग कर चुके हैं।

क्या भारत में भी लागू हो सकता है बैन?
भारत में सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है। ऐसे में पूर्ण प्रतिबंध लागू करना आसान नहीं होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में सीधे बैन की बजाय ये कदम उठाए जा सकते हैं:
सख्त आयु सत्यापन प्रणाली
पैरेंटल कंट्रोल को अनिवार्य करना
बच्चों के लिए अलग “सेफ मोड” प्लेटफॉर्म
स्कूल स्तर पर डिजिटल साक्षरता अभियान
एल्गोरिदम की निगरानी
सरकार डिजिटल इंडिया अभियान के तहत टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दे रही है, ऐसे में पूरी तरह बैन की संभावना कम लेकिन नियम सख्त होने की संभावना अधिक मानी जा रही है।

पीएम मोदी की प्रतिक्रिया क्या रही?
हालांकि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन भारत सरकार पहले भी डिजिटल सुरक्षा, साइबर क्राइम और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर रुख दिखा चुकी है।
भारत और फ्रांस के बीच टेक्नोलॉजी और साइबर सहयोग पर चर्चा के दौरान यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।
सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी
Facebook और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म्स का दावा है कि वे 13 साल से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने की अनुमति नहीं देते। साथ ही, वे एआई आधारित मॉनिटरिंग और कंटेंट फिल्टरिंग की व्यवस्था लागू कर चुके हैं। फिर भी आलोचकों का कहना है कि प्लेटफॉर्म्स का बिजनेस मॉडल अधिकतम यूजर एंगेजमेंट पर आधारित है, जिससे कम उम्र के बच्चे भी लंबे समय तक ऑनलाइन बने रहते हैं।

अभिभावकों की भूमिका क्यों अहम?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी प्रतिबंध से समस्या हल नहीं होगी।
बच्चों के स्क्रीन टाइम की निगरानी
डिजिटल व्यवहार पर खुली बातचीत
ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा
सोशल मीडिया उपयोग के लिए समय सीमा तय करना
ये कदम परिवार स्तर पर उठाना जरूरी है।

वैश्विक ट्रेंड क्या कहता है?
फ्रांस के अलावा कई यूरोपीय देश सोशल मीडिया पर आयु सीमा बढ़ाने और सख्त वेरिफिकेशन की दिशा में काम कर रहे हैं। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी इस विषय पर बहस तेज है।
डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा अब वैश्विक नीति का अहम हिस्सा बनती जा रही है।
फ्रांस द्वारा 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल नेटवर्क पर बैन की पहल ने भारत में भी बहस को जन्म दे दिया है। फिलहाल भारत में पूर्ण प्रतिबंध की संभावना कम दिखती है, लेकिन आने वाले समय में आयु सत्यापन और कंटेंट मॉनिटरिंग के नियम सख्त हो सकते हैं।
बच्चों की डिजिटल सुरक्षा केवल सरकार या प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अभिभावकों और समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।

