नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच चल रही संभावित ट्रेड डील (Trade Deal) को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की किसी भी अंतरराष्ट्रीय डील में राष्ट्रहित (National Interest) सर्वोपरि रहेगा। गोयल ने कहा, “अगर भारत को एक अच्छी डील मिल रही है, तो वह राष्ट्रहित छोड़कर कभी भी इस आधार पर तय नहीं की जाएगी कि हमारे अच्छे मित्र कौन हैं।” यह बयान उस समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर बातचीत तेज़ है। दोनों देशों के बीच बीते कुछ सालों में टैरिफ, तकनीकी सहयोग, और निवेश को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा होती रही है।
भारत का रुख स्पष्ट: राष्ट्रहित पहले
पीयूष गोयल ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि भारत अब किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में केवल “दोस्ती” के नाम पर समझौता नहीं करेगा, बल्कि जनता के हित, देश की आर्थिक सुरक्षा और दीर्घकालिक विकास को प्राथमिकता देगा। उन्होंने कहा, “भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट है—अगर हमें ऐसी डील मिलती है जो हमारे किसानों, उद्योगपतियों, और व्यापारियों के हित में है, तभी हम आगे बढ़ेंगे। कोई भी देश अपने मित्रता संबंधों के नाम पर अपनी अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।”
अमेरिका के साथ संबंध लेकिन शर्तों पर
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से मजबूत व्यापारिक संबंध रहे हैं। अमेरिका भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। साल 2024-25 के वित्तीय वर्ष में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 190 अरब डॉलर के पार पहुंच गया था।
हालांकि, बीते कुछ सालों में टैरिफ (शुल्क), फार्मा उत्पादों, आईटी सेवाओं, और कृषि निर्यात जैसे क्षेत्रों में कई बार मतभेद देखने को मिले हैं। अमेरिका चाहता है कि भारत अपने बाजार को और ज्यादा खोलें, वहीं भारत अपने घरेलू उद्योग और किसानों के हितों की रक्षा को लेकर सतर्क है। पीयूष गोयल ने कहा, “अमेरिका भारत का मजबूत साथी है और रहेगा, लेकिन हमें ऐसे फैसले लेने होंगे जो हमारे लोगों के लिए फायदेमंद हों। हम किसी दबाव में नहीं झुकेंगे।”
भारत की आर्थिक नीति पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि पीयूष गोयल का यह बयान भारत की ‘राष्ट्रहित सर्वोपरि’ नीति का प्रतीक है। बीते वर्षों में भारत ने कई देशों के साथ ऐसे व्यापार समझौतों पर काम किया है, जिनमें स्थानीय उद्योगों के हित, रोजगार सृजन, और निर्यात बढ़ाने को प्राथमिकता दी गई है।
भारत ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया, यूएई, और यूरोपीय संघ के साथ भी व्यापारिक चर्चाओं को नई दिशा दी है। ऐसे में अमेरिका के साथ डील को लेकर भारत सावधानीपूर्वक रुख अपना रहा है ताकि घरेलू बाजार को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
ट्रेड एक्सपर्ट्स की राय
ट्रेड एनालिस्ट्स का कहना है कि गोयल का बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त संदेश है कि भारत अब किसी भी आर्थिक डील में “समान साझेदारी” चाहता है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री डॉ. संजय अग्रवाल कहते हैं, “भारत का स्टैंड स्पष्ट है—अब न तो दबाव में कोई निर्णय होगा और न ही भावनाओं में बहकर। ट्रेड डील का मतलब है आपसी लाभ, न कि एकतरफा रियायत।”
भारत का फोकस: मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात
भारत सरकार ने बीते वर्षों में ‘मेक इन इंडिया’, ‘पीएलआई स्कीम’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसी योजनाओं के जरिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मज़बूती दी है।
पीयूष गोयल ने कहा कि अब भारत केवल कच्चा माल बेचने वाला देश नहीं, बल्कि वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्टर बनना चाहता है। इस नीति के तहत, भारत उन डील्स पर ही आगे बढ़ेगा जो उसकी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और रोजगार सृजन में मदद करें।
वैश्विक मंच पर भारत की नई पहचान
भारत इस समय G20, WTO और अन्य वैश्विक मंचों पर अपनी आर्थिक और कूटनीतिक ताकत दिखा रहा है। भारत ने कई मौकों पर कहा है कि वह मुक्त और निष्पक्ष व्यापार (Free and Fair Trade) का समर्थन करता है, लेकिन किसी भी समझौते में समान अवसर और परस्पर लाभ की शर्त रखेगा। गोयल ने कहा, “भारत किसी भी देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि हम चाहते हैं कि हर समझौता दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो। यही असली साझेदारी की भावना है।”
राष्ट्रहित सर्वोपरि नीति का दोहराव
पीयूष गोयल का यह बयान एक बार फिर दिखाता है कि भारत अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में आत्मविश्वास से भरा देश बन चुका है। भारत अपने हितों की रक्षा करते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुख आने वाले वर्षों में भारत की ट्रेड पॉलिसी की दिशा तय करेगा — जहाँ दोस्ती नहीं, राष्ट्रहित पहले की नीति हर समझौते की आधारशिला होगी

