By: Vikash Kumar (Vicky)
India-US Trade Deal के तहत भारत को और भी रियायतें मिलने की उम्मीद नजर आ रही है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिए हैं कि इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते से देश के टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देश एक व्यापक और संतुलित ट्रेड डील की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

पीयूष गोयल ने हाल ही में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान कहा कि सरकार भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा करते हुए अमेरिका के साथ बेहतर व्यापारिक शर्तों पर बातचीत कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से टेक्सटाइल और परिधान उद्योग का जिक्र करते हुए कहा कि यदि प्रस्तावित रियायतें लागू होती हैं, तो भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता अमेरिकी बाजार में काफी बढ़ जाएगी।

टेक्सटाइल सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह क्षेत्र करोड़ों लोगों को रोजगार देता है और देश के कुल निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान करता है। मौजूदा समय में अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़े निर्यात बाजारों में से एक है। ऐसे में यदि आयात शुल्क में कटौती या अन्य व्यापारिक बाधाओं में ढील मिलती है, तो भारतीय कपड़ा उद्योग को सीधा लाभ मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को अमेरिकी बाजार में शुल्क में छूट या विशेष व्यापारिक दर्जा मिलता है, तो रेडीमेड गारमेंट्स, होम टेक्सटाइल, तकनीकी वस्त्र और कॉटन उत्पादों की मांग में तेजी आ सकती है। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि घरेलू उत्पादन और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।

हाल के वर्षों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव देखने को मिला है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां चीन के विकल्प के रूप में भारत की ओर रुख कर रही हैं। ऐसे में यदि India-US Trade Deal के तहत भारत को अतिरिक्त रियायतें मिलती हैं, तो यह “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों को और मजबूती देगा।

पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि भारत एक संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले समझौते की दिशा में काम कर रहा है। सरकार का प्रयास है कि घरेलू उद्योगों के हित सुरक्षित रहें और किसानों, एमएसएमई तथा निर्यातकों को अधिकतम फायदा मिले। टेक्सटाइल सेक्टर के अलावा फार्मा, आईटी, इंजीनियरिंग गुड्स और कृषि उत्पादों को भी संभावित लाभ मिल सकता है।

व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार का आंकड़ा नई ऊंचाइयों को छू सकता है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापार होता है, जिसे आने वाले वर्षों में और बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

टेक्सटाइल उद्योग के प्रतिनिधियों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अमेरिका जैसे बड़े बाजार में बेहतर पहुंच मिलने से भारतीय उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी। साथ ही छोटे और मध्यम उद्यमों को भी निर्यात के नए अवसर मिलेंगे।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी भी ट्रेड डील में संतुलन बेहद जरूरी होता है। भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि घरेलू बाजार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े और आयात में असंतुलन न बढ़े। सरकार इस दिशा में सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही है।

कुल मिलाकर, India-US Trade Deal को भारत के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है। यदि प्रस्तावित रियायतें और शुल्क में छूट लागू होती हैं, तो टेक्सटाइल सेक्टर को विशेष रूप से बड़ा लाभ मिल सकता है। आने वाले समय में इस समझौते की शर्तें और स्पष्ट होंगी, लेकिन अभी से उद्योग जगत में सकारात्मक माहौल नजर आ रहा है।

भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग से न केवल व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि रणनीतिक साझेदारी भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी। अब सबकी निगाहें इस संभावित ट्रेड डील के अंतिम रूप और उसके लागू होने की प्रक्रिया पर टिकी हैं।
