By: Vikash Kumar (Vicky)
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की हवाई यात्रा पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान से जुड़े युद्ध और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा प्रभाव जेट ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर पड़ रहा है। इसी बढ़ती लागत को देखते हुए देश की प्रमुख एयरलाइन एयर इंडिया ने अपने टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का फैसला किया है।

एयर इंडिया के इस फैसले के बाद यात्रियों को अब पहले की तुलना में अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है। कंपनी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी के कारण परिचालन लागत बढ़ गई है, जिससे फ्यूल सरचार्ज बढ़ाना आवश्यक हो गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष वैश्विक ऊर्जा बाजार को सीधे प्रभावित करता है। इस क्षेत्र को दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है। ऐसे में यदि यहां तनाव बढ़ता है या आपूर्ति प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं।
हाल के दिनों में ईरान से जुड़े युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है। इसका असर भारत में भी दिखाई दे रहा है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।

एविएशन सेक्टर पर इसका प्रभाव सबसे पहले दिखाई देता है क्योंकि जेट ईंधन एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत का लगभग 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा होता है। जैसे ही ईंधन महंगा होता है, एयरलाइंस के लिए संचालन करना महंगा हो जाता है।
इसी कारण एयर इंडिया ने यात्रियों पर अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लगाने का फैसला किया है। एयरलाइन के अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय अस्थायी हो सकता है और यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें स्थिर होती हैं तो सरचार्ज में कमी भी की जा सकती है।

एयरलाइन उद्योग के जानकारों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो अन्य एयरलाइंस भी अपने किराए में बढ़ोतरी कर सकती हैं। इससे हवाई यात्रा की लागत और अधिक बढ़ सकती है।
इसका असर खासतौर पर घरेलू यात्रियों और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर पड़ सकता है। कई यात्रियों के लिए अचानक बढ़ा हुआ किराया यात्रा योजनाओं को प्रभावित कर सकता है।

दूसरी ओर सरकार और विमानन क्षेत्र के अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती रही तो एयरलाइंस के लिए अपने परिचालन को संतुलित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भारत सरकार पहले ही ईंधन आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर रणनीतिक कदम उठा रही है। कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता लाने और दीर्घकालिक समझौतों के जरिए कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता है। चाहे वह पेट्रोल-डीजल की कीमत हो या हवाई यात्रा का किराया, अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का प्रभाव भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में जल्दी दिखाई देता है।
फिलहाल एयर इंडिया द्वारा फ्यूल सरचार्ज बढ़ाए जाने का फैसला इस बात का संकेत है कि वैश्विक तनाव का असर भारत के विमानन क्षेत्र पर भी पड़ने लगा है। आने वाले दिनों में यदि तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी होती है तो अन्य एयरलाइंस भी इसी तरह के कदम उठा सकती हैं।
ऐसे में यात्रियों को हवाई यात्रा के लिए पहले से अधिक बजट तैयार रखना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक विमानन क्षेत्र पर दबाव बना रह सकता है।

