By: Vikash Kumar (Vicky)
तेल अवीव/तेहरान। पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। इजरायल ने ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया है, जिसके बाद राजधानी तेहरान के सेंट्रल इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है और इजरायल में आपातकाल (इमरजेंसी) घोषित कर दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देर रात इजरायली वायुसेना ने ईरान के कुछ रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। हमले के तुरंत बाद तेहरान के कई हिस्सों में धमाकों की आवाज सुनाई दी, जिससे स्थानीय नागरिकों में दहशत फैल गई। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में आसमान में धुएं के गुबार और सायरन की आवाजें सुनी जा सकती हैं। हालांकि, ईरान सरकार ने अभी तक नुकसान के आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं।

इजरायल सरकार ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा है कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर की गई है। इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि ईरान की ओर से लगातार मिल रही धमकियों और संभावित हमलों को देखते हुए यह ‘प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक’ थी। सरकार ने देशभर में इमरजेंसी लागू करते हुए नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
उधर, ईरान ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। तेहरान में शीर्ष अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई गई है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस हमले का जवाब दिया जाएगा और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालने की जिम्मेदारी इजरायल पर होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला लंबे समय से चल रहे इजरायल-ईरान तनाव का बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, सीरिया और लेबनान में प्रभाव को लेकर लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई थी। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच बयानबाजी और साइबर हमलों की घटनाएं भी बढ़ी थीं।
हमले के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने कहा है कि किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से क्षेत्रीय शांति को गंभीर खतरा हो सकता है।

इजरायल में आपातकाल लागू होने के बाद स्कूल, सार्वजनिक कार्यक्रम और कई उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। देश की सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सीमा क्षेत्रों में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की गई है। नागरिकों को बंकरों और सुरक्षित स्थानों की जानकारी दी जा रही है।
तेहरान में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर आंशिक प्रतिबंध की खबरें हैं। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते इस संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है, जिससे विश्व अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ेगा।

फिलहाल, दोनों देशों की ओर से अगली रणनीति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। दुनिया भर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह टकराव व्यापक युद्ध का रूप लेगा या कूटनीतिक प्रयासों से हालात को नियंत्रित किया जा सकेगा।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पश्चिम एशिया को अस्थिरता के मुहाने पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, यह दोनों देशों के फैसलों और अंतरराष्ट्रीय दबाव पर निर्भर करेगा।

