चेन्नई/श्रीहरिकोटा: भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। संगठन ने शनिवार को भारतीय नौसेना के लिए विशेष रूप से विकसित CMS-03 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण किया। यह सैटेलाइट अंतरिक्ष आधारित संचार और समुद्री इलाकों की निगरानी को और अधिक सशक्त बनाएगा। इस लॉन्च के साथ भारत ने अपनी स्पेस-बेस्ड डिफेंस और मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस (Maritime Domain Awareness) क्षमता में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है।
श्रीहरिकोटा से हुआ लॉन्च
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC) से शनिवार सुबह GSLV Mk-II रॉकेट के जरिए CMS-03 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया गया। इस लॉन्च के कुछ ही मिनट बाद इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने घोषणा की कि सैटेलाइट ने अपनी निर्धारित कक्षा में प्रवेश कर लिया है और सभी प्रणालियाँ सामान्य रूप से कार्य कर रही हैं।
इसरो की ओर से बताया गया कि CMS-03 एक उन्नत संचार सैटेलाइट है, जो भारतीय नौसेना को समुद्री क्षेत्र में रीयल टाइम कम्युनिकेशन और निगरानी की सुविधा देगा।
नौसेना की ताकत में होगा इजाफा
CMS-03 सैटेलाइट के सफल प्रक्षेपण के बाद भारतीय नौसेना की क्षमताओं में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। अब नौसेना अपने जहाजों, पनडुब्बियों और तटीय निगरानी तंत्र से अधिक प्रभावी तरीके से जुड़ी रह सकेगी। इससे “स्पेस टू सी” (Space to Sea) रणनीति को मजबूती मिलेगी और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और निगरानी में नई तकनीकी शक्ति जुड़ जाएगी।
नौसेना अधिकारियों का कहना है कि CMS-03 की मदद से समुद्र में मौजूद भारतीय जहाजों के बीच सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन नेटवर्क तैयार होगा। साथ ही, यह सैटेलाइट भारतीय उपमहाद्वीप के आस-पास के समुद्री इलाकों में किसी भी अवैध गतिविधि, जहाजों की मूवमेंट या संभावित खतरे की पहचान करने में सहायक सिद्ध होगा।
‘Made in India’ टेक्नोलॉजी का उदाहरण
CMS-03 पूरी तरह से भारत में विकसित की गई तकनीक पर आधारित है। इसे इसरो के बेंगलुरु और अहमदाबाद केंद्रों में डिजाइन और तैयार किया गया। इसमें उपयोग किए गए एंटीना, पेलोड, और ट्रांसपोंडर पूरी तरह भारतीय तकनीक से निर्मित हैं।
इसरो के वैज्ञानिकों का कहना है कि CMS-03, पूर्व में लॉन्च किए गए GSAT सीरीज के सैटेलाइट्स की तरह ही काम करेगा, लेकिन इसमें और भी उन्नत फीचर्स जोड़े गए हैं। इससे डेटा ट्रांसफर की स्पीड और सिग्नल की स्पष्टता पहले से कहीं बेहतर होगी।
भारत की रणनीतिक बढ़त
विशेषज्ञों का कहना है कि CMS-03 की तैनाती भारत को रणनीतिक रूप से मजबूत बनाएगी। समुद्री सीमा सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, समुद्र में फंसे जहाजों की लोकेशन ट्रैकिंग और दुश्मन देशों की गतिविधियों पर नजर रखने जैसे कई कार्य अब और भी आसान होंगे। भारत के पास पहले से ही कई संचार सैटेलाइट्स हैं, लेकिन यह मिशन विशेष रूप से भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है। इस सैटेलाइट से दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी।
इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ का बयान
लॉन्च के बाद इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने कहा,
“CMS-03 मिशन भारत के स्पेस-बेस्ड डिफेंस नेटवर्क को नई ऊंचाई देगा। यह सैटेलाइट भारतीय नौसेना को अत्याधुनिक संचार सुविधाएं प्रदान करेगा और देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि यह मिशन ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को सशक्त बनाता है और यह इस बात का प्रमाण है कि भारत अब हर क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक से आत्मनिर्भर होता जा रहा है।
सैटेलाइट की तकनीकी विशेषताएं
वजन: लगभग 2,300 किलोग्राम
ऑर्बिट: जियोस्टेशनरी कक्षा (लगभग 36,000 किमी ऊँचाई पर)
कवरेज एरिया: भारतीय उपमहाद्वीप और हिंद महासागर क्षेत्र
आयु: 12 वर्ष
मुख्य कार्य: सुरक्षित नौसैनिक संचार, डेटा ट्रांसमिशन, संकट प्रबंधन, निगरानी सहायता
मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA) को बढ़ावा
CMS-03 सैटेलाइट भारत की मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA) रणनीति का अहम हिस्सा है। MDA के तहत भारत अपने आसपास के समुद्री क्षेत्रों की लगातार निगरानी करता है ताकि किसी भी संभावित खतरे का पहले से पता लगाया जा सके।
इस सैटेलाइट की मदद से नौसेना अब अपने रडार और सेंसर डेटा को सीधे अंतरिक्ष से जोड़ पाएगी, जिससे रियल टाइम सिचुएशन अवेयरनेस सुनिश्चित होगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती साख
CMS-03 के लॉन्च से भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह न केवल नागरिक अंतरिक्ष मिशनों में बल्कि रक्षा संबंधी स्पेस मिशनों में भी विश्वस्तरीय क्षमता रखता है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इसरो की यह सफलता भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक स्पेस पावर के रूप में और अधिक प्रतिष्ठा दिलाएगी।
ISRO द्वारा CMS-03 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र दोनों में नई उपलब्धि है। इससे भारतीय नौसेना को न सिर्फ तकनीकी मजबूती मिलेगी, बल्कि यह देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और रणनीतिक निगरानी के क्षेत्र में निर्णायक बदलाव लाएगा।
भारत ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वह अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर, सक्षम और दूरदर्शी राष्ट्र है।

