जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसने पूरे शहर को हिला दिया। शहर के एक नामी निजी स्कूल में पढ़ने वाली 9 साल की बच्ची की मौत ने हर किसी को हैरान कर दिया है। यह घटना इतनी रहस्यमयी है कि माता-पिता से लेकर पुलिस तक सभी के मन में कई सवाल उठ रहे हैं — आखिर एक नन्ही बच्ची स्कूल की रेलिंग पर क्यों चढ़ी? स्कूल प्रशासन ने तुरंत सूचना देने के बजाय देरी क्यों की? और क्या इस मौत के पीछे किसी की लापरवाही या छिपाने की कोशिश है?
घटना कैसे हुई?
जानकारी के मुताबिक, यह दर्दनाक घटना जयपुर के मानसरोवर इलाके स्थित एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में हुई। शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे क्लास के बीच 9 साल की बच्ची अचानक स्कूल की दूसरी मंजिल की रेलिंग पर चढ़ गई। कुछ ही सेकंड में वह रेलिंग से नीचे गिर पड़ी। हादसे के बाद स्कूल परिसर में अफरातफरी मच गई। शिक्षकों ने बच्ची को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्ची के गिरने की आवाज सुनकर स्कूल स्टाफ दौड़ पड़ा। शुरुआती जांच में बताया जा रहा है कि बच्ची स्कूल की बालकनी से नीचे गिरी थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह हादसा था या किसी की गलती से हुआ।
परिजनों का आरोप – “सच छिपा रहा है स्कूल प्रशासन”
मृत बच्ची के पिता ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने परिवार को देर से सूचना दी और घटना के बारे में सच छिपाने की कोशिश की। उनका कहना है कि जब वे अस्पताल पहुंचे, तब उन्हें बताया गया कि उनकी बेटी गिर गई थी। पिता ने सवाल उठाया – “अगर बच्ची तुरंत गिरी थी, तो हमें आधे घंटे बाद क्यों बताया गया? सीसीटीवी फुटेज हमें क्यों नहीं दिखाया जा रहा?”
परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बच्ची की मौत हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही का नतीजा है। उनका कहना है कि स्कूल में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर थी। रेलिंग की ऊंचाई इतनी कम थी कि कोई भी बच्चा आसानी से ऊपर चढ़ सकता था।
पुलिस जांच शुरू, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने स्कूल के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब्त कर ली है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि बच्ची अपने सहपाठियों के साथ खेल रही थी और इसी दौरान रेलिंग पर चढ़ गई।
जयपुर के डीसीपी (साउथ) ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का पता चल पाएगा। फिलहाल, पुलिस ने स्कूल प्रशासन से जवाब मांगा है कि घटना के वक्त सुरक्षा स्टाफ और शिक्षक कहां थे।
स्कूल प्रशासन की सफाई
स्कूल प्रबंधन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि “यह एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना है। जैसे ही हमें घटना की जानकारी मिली, हमने बच्ची को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। प्रशासन हर संभव सहयोग कर रहा है।”
हालांकि, स्कूल की इस सफाई से परिजन संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर स्कूल ने पहले ही सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त की होती तो यह हादसा टल सकता था।
स्थानीय लोगों में गुस्सा, प्रदर्शन की चेतावनी
घटना के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा फैल गया है। मोहल्ले के लोगों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। लोगों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। कुछ सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हादसे स्कूलों में सुरक्षा मानकों की कमी को उजागर करते हैं। ज्यादातर निजी स्कूलों में सुरक्षा कैमरे और बालकनी रेलिंग के लिए पर्याप्त ऊंचाई के मानक तय नहीं किए गए हैं।
बाल सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, “9 साल की उम्र में बच्चे बहुत जिज्ञासु होते हैं। स्कूलों की जिम्मेदारी है कि वे इस उम्र के बच्चों के लिए अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करें।”
शहर में मातम का माहौल
इस घटना के बाद जयपुर शहर में मातम का माहौल है। बच्ची की मौत की खबर जैसे ही फैली, सोशल मीडिया पर लोगों ने शोक जताया और स्कूल प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की। कई लोगों ने लिखा – “बच्चे स्कूल जाते हैं सीखने के लिए, मरने के लिए नहीं।”
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने फिलहाल मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। प्रशासन ने शिक्षा विभाग से भी रिपोर्ट मांगी है कि स्कूल में सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा था या नहीं। अगर लापरवाही साबित हुई, तो स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जयपुर के निजी स्कूल में 9 साल की बच्ची की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि स्कूल सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। इस घटना ने अभिभावकों के मन में डर पैदा कर दिया है और यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारे बच्चे स्कूलों में वाकई सुरक्षित हैं?

