आसनसोल/जसीडीह, 24 जनवरी 2026।
पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल अंतर्गत जसीडीह रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा ऑपरेशन “जीवन रक्षा” के तहत एक सराहनीय और साहसिक कार्य सामने आया, जहां आरपीएफ जवान की त्वरित कार्रवाई से एक महिला यात्री की जान बच गई। यह घटना रेलवे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती और आरपीएफ की सतर्कता का जीवंत उदाहरण है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 24 जनवरी 2026 की सुबह करीब 05:37 बजे जब ट्रेन संख्या 12331 जसीडीह स्टेशन से प्रस्थान कर रही थी, उसी दौरान एक महिला यात्री भारी सामान लेकर चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रही थी। ट्रेन की गति और संतुलन बिगड़ने के कारण महिला फिसल गई, जिससे उसका आधा शरीर ट्रेन के अंदर और आधा बाहर रह गया। स्थिति अत्यंत भयावह और जानलेवा बन गई थी।

सीपीडीएस टीम की सतत निगरानी बनी जीवन रक्षक
घटना के समय आरपीएफ पोस्ट/दुमका के कांस्टेबल प्रमोद कुमार, जो वर्तमान में जसीडीह स्टेशन पर सीपीडीएस (क्राइम प्रिवेंशन एंड डिटेक्शन स्क्वाड) टीम के साथ तैनात थे, प्लेटफॉर्म और स्टेशन परिसर में निगरानी ड्यूटी पर मौजूद थे। सीपीडीएस टीम का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, अपराध और दुर्घटनाओं की रोकथाम करना तथा संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखना होता है।
महिला यात्री को असंतुलित होकर गिरते देख कांस्टेबल प्रमोद कुमार ने बिना एक पल गंवाए दौड़कर महिला को मजबूती से पकड़ लिया और अपनी जान की परवाह किए बिना उसे सुरक्षित रूप से प्लेटफॉर्म की ओर खींच लिया। उनकी इस त्वरित और साहसिक कार्रवाई से एक बड़ी दुर्घटना टल गई और महिला यात्री पूरी तरह सुरक्षित बच गईं।

ऑपरेशन ‘जीवन रक्षा’ की सार्थकता
यह घटना आरपीएफ द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन “जीवन रक्षा” की सफलता को दर्शाती है। इस अभियान का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की जान की रक्षा करना, दुर्घटनाओं को रोकना और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है। ऑपरेशन जीवन रक्षा के अंतर्गत आरपीएफ जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत और सही निर्णय ले सकें।
आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि रेलवे सुरक्षा बल न केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित है, बल्कि यात्रियों की जान बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

रेलवे प्रशासन ने की प्रशंसा
घटना के बाद रेलवे प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों ने कांस्टेबल प्रमोद कुमार की सराहना की है। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के साहसिक कार्य न केवल अन्य जवानों के लिए प्रेरणा हैं बल्कि यात्रियों में भी सुरक्षा का विश्वास मजबूत करते हैं।
रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से भी अपील की है कि वे चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने का प्रयास न करें, क्योंकि यह जानलेवा साबित हो सकता है। सुरक्षा नियमों का पालन कर ही सुरक्षित यात्रा संभव है।
यात्रियों की सुरक्षा रेलवे की प्राथमिकता
आसनसोल मंडल के अंतर्गत आने वाले सभी प्रमुख स्टेशनों पर आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। सीसीटीवी कैमरे, पेट्रोलिंग, सीपीडीएस टीम और विशेष अभियानों के माध्यम से रेलवे यात्रियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी यात्रियों की सुरक्षा को और बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित बलों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
सोशल मीडिया पर सराहना
इस घटना की जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग आरपीएफ जवान की बहादुरी की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं। आम नागरिकों ने इसे “रियल हीरो” का दर्जा देते हुए कहा कि ऐसे जवानों की वजह से ही रेलवे आज यात्रियों के लिए सुरक्षित बन पाया है।
निष्कर्ष
जसीडीह रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ द्वारा दिखाई गई तत्परता और साहस यह साबित करता है कि रेलवे सुरक्षा बल न केवल कानून व्यवस्था संभालता है बल्कि हर यात्री की जान को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। ऑपरेशन “जीवन रक्षा” के तहत यह घटना रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की सफलता की एक मजबूत मिसाल है।

