By: Vikash Kumar (Vicky)
झारखंड में बेलगाम हाथियों के आतंक से निपटने के लिए वन विभाग ने अब बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। राज्य के कई जिलों में पिछले एक महीने के दौरान 25 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है। खेतों की फसल बर्बाद हो रही है, घर टूट रहे हैं और लोग रातें जागकर गुजारने को मजबूर हैं। ऐसे हालात में झारखंड सरकार ने कर्नाटक से छह प्रशिक्षित ‘कुनकी’ हाथियों को बुलाने का फैसला किया है, जो हिंसक और बेकाबू हाथियों को काबू करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह विशेष अभियान ‘ऑपरेशन कुनकी’ के नाम से चलाया जाएगा। इन प्रशिक्षित हाथियों की मदद से जंगली हाथियों को ‘हनी ट्रैप’ तकनीक के जरिए जंगल की ओर मोड़ा जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि कुनकी हाथी बेहद अनुशासित और प्रशिक्षित होते हैं, जिन्हें जंगली हाथियों को नियंत्रित करने और उन्हें सुरक्षित स्थान तक ले जाने का अनुभव होता है।

क्या है ‘हनी ट्रैप’ रणनीति?
वन अधिकारियों के अनुसार, ‘हनी ट्रैप’ का मतलब यहां किसी जाल या धोखे से नहीं, बल्कि आकर्षण की रणनीति से है। कुनकी हाथियों को जंगली झुंड के पास भेजा जाएगा। ये प्रशिक्षित हाथी जंगली हाथियों को अपनी ओर आकर्षित करेंगे और धीरे-धीरे उन्हें आबादी वाले इलाकों से दूर जंगल की ओर ले जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया में विशेषज्ञ महावत और वन्यजीव चिकित्सकों की टीम भी तैनात रहेगी।

क्यों बढ़ा हाथियों का आतंक?
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में घटते संसाधन, अवैध खनन, पेड़ों की कटाई और मानव बस्तियों का तेजी से विस्तार इस समस्या की बड़ी वजह है। हाथियों के पारंपरिक रास्तों (कॉरिडोर) पर अतिक्रमण होने से वे भटककर गांवों में घुस आते हैं। खासकर फसल के मौसम में हाथी खेतों की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे टकराव की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

झारखंड के सरायकेला-खरसावां, चाईबासा, लातेहार और गुमला जैसे जिलों में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शाम होते ही हाथियों का झुंड गांव की ओर बढ़ आता है। कई जगहों पर लोगों ने डर के कारण अपने घर छोड़ दिए हैं।
कर्नाटक से क्यों बुलाए गए कुनकी हाथी?
दक्षिण भारत, खासकर कर्नाटक में कुनकी हाथियों का लंबे समय से उपयोग होता रहा है। वहां वन विभाग जंगली हाथियों को पकड़ने, बचाने और स्थानांतरित करने के लिए इनका सहारा लेता है। इन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे आक्रामक हाथियों के सामने भी शांत और नियंत्रित रहें।

वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक से आने वाले छह कुनकी हाथियों के साथ अनुभवी महावतों की टीम भी पहुंचेगी। अभियान के दौरान ड्रोन, जीपीएस ट्रैकिंग और निगरानी दल भी तैनात रहेंगे, ताकि किसी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
राज्य सरकार ने प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त वनकर्मियों की तैनाती की है। गांवों में माइकिंग कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। स्कूलों के समय में बदलाव और रात में बाहर न निकलने की हिदायत भी दी गई है। साथ ही, मुआवजा प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत मिल सके।

क्या स्थायी समाधान है?
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि कुनकी अभियान तत्काल राहत तो देगा, लेकिन स्थायी समाधान के लिए हाथी कॉरिडोर की बहाली और संरक्षण जरूरी है। यदि जंगलों में पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध कराया जाए और अवैध अतिक्रमण रोका जाए, तो मानव-हाथी संघर्ष में कमी लाई जा सकती है।

सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में हाथी कॉरिडोर विकसित करने और प्रभावित जिलों में सोलर फेंसिंग लगाने की योजना पर भी काम किया जाएगा। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे।
उम्मीदों पर टिका ‘ऑपरेशन कुनकी’
फिलहाल, पूरे राज्य की नजर इस विशेष अभियान पर टिकी है। यदि कुनकी हाथियों की मदद से हिंसक झुंड को सुरक्षित तरीके से जंगल में वापस भेजने में सफलता मिलती है, तो यह झारखंड के लिए बड़ी राहत होगी। वन विभाग का दावा है कि अभियान पूरी तरह वैज्ञानिक और मानवीय तरीके से चलाया जाएगा, ताकि न तो लोगों को नुकसान पहुंचे और न ही हाथियों को।

झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष की यह चुनौती गंभीर है, लेकिन ‘हनी ट्रैप’ रणनीति और प्रशिक्षित कुनकी हाथियों की मदद से हालात पर काबू पाने की कोशिश तेज हो गई है। अब देखना होगा कि यह रणनीति कितनी कारगर साबित होती है और क्या इससे ग्रामीणों को लंबे समय से चली आ रही दहशत से मुक्ति मिल पाती है।

