By: Vikash Kumar (Vicky)
रांची। झारखंड में लंबे समय से प्रतीक्षित नगर निकाय चुनाव को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों की प्रक्रिया को लेकर संभावित कार्यक्रम सामने आया है। हालांकि, आधिकारिक अधिसूचना का अभी इंतज़ार किया जा रहा है, लेकिन सूत्रों के अनुसार चुनावी शेड्यूल लगभग तय माना जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 27 जनवरी 2026 को नगर निकाय चुनावों की अधिसूचना जारी की जा सकती है। इसके साथ ही राज्यभर में चुनावी प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी। झारखंड में करीब छह वर्षों से नगर निकाय चुनाव नहीं हुए हैं, ऐसे में यह चुनाव स्थानीय लोकतंत्र के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं।

नामांकन से लेकर मतदान तक का संभावित कार्यक्रम
सूत्रों के मुताबिक, नामांकन प्रक्रिया 27 जनवरी से शुरू होकर 4 फरवरी 2026 तक चलेगी। इस दौरान इच्छुक उम्मीदवार अपने-अपने संबंधित नगर निकाय क्षेत्रों में नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। नामांकन के बाद 6 और 7 फरवरी को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद 10 फरवरी तक प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न (सिंबल) आवंटित किए जाने की संभावना है। चुनाव चिह्न मिलने के साथ ही सभी दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रचार अभियान तेज हो जाएगा।
26 फरवरी को मतदान, 28 फरवरी या 1 मार्च को मतगणना
झारखंड नगर निकाय चुनाव के तहत 26 फरवरी 2026 को मतदान कराए जाने की तैयारी है। मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से व्यापक तैयारियाँ की जा रही हैं। वहीं, मतगणना 28 फरवरी या 01 मार्च 2026 को कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। मतगणना के साथ ही राज्य को नए नगर निकाय प्रतिनिधि मिल जाएंगे और स्थानीय सरकारों का गठन संभव हो सकेगा।
किन निकायों में होंगे चुनाव
इस चुनाव के तहत झारखंड के सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में मतदान कराया जाएगा। इसमें रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, देवघर, हजारीबाग समेत कई प्रमुख शहरी निकाय शामिल हैं। विशेष बात यह है कि पिछली बार कई नगर निकायों में चुनाव आरक्षण विवाद और कानूनी अड़चनों के कारण टल गए थे। ऐसे में इस बार चुनाव को लेकर जनता में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

आरक्षण और OBC मुद्दा बना अहम
नगर निकाय चुनाव में पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर पहले ही राजनीतिक बहस तेज रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूला लागू होने के बाद ही चुनाव कराए जाने की बाध्यता थी। राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के स्तर पर इस दिशा में प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जिससे अब चुनाव का रास्ता साफ माना जा रहा है।
राजनीतिक दलों की तैयारी तेज
नगर निकाय चुनाव की आहट मिलते ही सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों ने तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।
झामुमो, कांग्रेस और राजद गठबंधन के तौर पर रणनीति बनाने में जुटे हैं।
वहीं भाजपा इस चुनाव को सरकार के खिलाफ जनमत संग्रह के रूप में देख रही है।
पार्टी नेतृत्व संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन कर रहा है और जमीनी समीकरणों को साधने की कोशिश तेज हो गई है।
जनता की निगाहें स्थानीय मुद्दों पर
इस चुनाव में पेयजल, सड़क, सफाई, स्ट्रीट लाइट, जलजमाव और कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दे प्रमुख रहने की संभावना है। शहरी मतदाता स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर इस बार ज्यादा सजग नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे अंतराल के बाद हो रहे नगर निकाय चुनावों में मतदान प्रतिशत बढ़ सकता है, जिससे जनादेश की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार
हालांकि चुनावी तारीखों को लेकर संभावित कार्यक्रम सामने आ चुका है, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा अभी शेष है। अधिसूचना जारी होते ही सभी तारीखों पर अंतिम मुहर लग जाएगी।
राज्यभर की राजनीतिक पार्टियों, प्रशासन और आम जनता की निगाहें अब 27 जनवरी पर टिकी हुई हैं, जब चुनावी अधिसूचना जारी होने की संभावना है

