By: Vikash Kumar (Vicky)
रांची/ प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत कार्यरत कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। ग्रामीण राज्य आवास कर्मी संघ, झारखंड के बैनर तले राज्य, जिला और प्रखंड स्तर पर कार्यरत पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने मंगलवार को जिला मुख्यालयों के बाहर एक दिवसीय धरना देकर सरकार और विभाग का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित किया।

संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2015-16 से अनुबंध के आधार पर कार्यरत PMAY-G कर्मियों ने राज्य में ग्रामीण आवास योजना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है। इसके बावजूद लंबे समय से उनकी मांगों और समस्याओं पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कर्मियों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई और कार्यभार के बावजूद उनका मानदेय बेहद कम है, जिससे उन्हें आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

धरना कार्यक्रम के दौरान संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों के समाधान की अपील की, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है। कर्मियों का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सफल क्रियान्वयन में प्रखंड और जिला स्तर के कर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यही कर्मचारी लाभुकों के चयन से लेकर योजना के क्रियान्वयन, निगरानी और रिपोर्टिंग तक की जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें उचित मानदेय और सेवा सुरक्षा नहीं मिल रही है।
संघ ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग कर्मियों के मासिक मानदेय में वृद्धि की है। संघ का कहना है कि प्रखंड स्तर पर कार्यरत लेखापाल सह कंप्यूटर ऑपरेटर का मानदेय वर्तमान में 10 हजार रुपये है, जिसे बढ़ाकर 36 हजार रुपये किया जाना चाहिए। इसी तरह प्रखंड समन्वयक का मानदेय 18 हजार रुपये से बढ़ाकर 45 हजार रुपये करने की मांग की गई है।

जिला स्तर पर कार्यरत लेखापाल सह कंप्यूटर ऑपरेटर का मानदेय भी बढ़ाने की मांग की गई है। वर्तमान में उनका मानदेय 15 हजार रुपये है, जिसे बढ़ाकर 41 हजार रुपये करने का प्रस्ताव संघ ने रखा है। इसके अलावा जिला प्रशिक्षण समन्वयक और जिला समन्वयक के वर्तमान मानदेय में 70 प्रतिशत की वृद्धि करने की मांग की गई है।
संघ ने राज्य स्तर पर कार्यरत विशेषज्ञ पदाधिकारियों के मानदेय में भी 70 प्रतिशत वृद्धि की मांग की है। उनका कहना है कि योजना के संचालन और निगरानी में इन पदों की जिम्मेदारी काफी अधिक होती है, इसलिए उनके मानदेय में वृद्धि आवश्यक है।

इसके अलावा संघ ने जिला और प्रखंड स्तर पर कार्यरत पदाधिकारियों और कर्मियों के पदों को प्रशासी पदवर्ग समिति से स्वीकृत कराने की मांग की है। संघ का कहना है कि इससे कर्मियों की सेवा संरचना स्पष्ट होगी और उन्हें भविष्य में बेहतर सेवा सुरक्षा मिल सकेगी।
एक अन्य महत्वपूर्ण मांग यह है कि कर्मियों के मासिक मानदेय को परिवर्तित कर ग्रेड-पे का निर्धारण किया जाए। संघ का कहना है कि ग्रेड-पे प्रणाली लागू होने से कर्मियों को नियमित सेवा के समान लाभ मिल सकेंगे और उनका भविष्य सुरक्षित हो सकेगा।
संघ ने यह भी मांग की है कि योजना के अनुश्रवण और क्षेत्र भ्रमण के लिए क्षेत्रीय कर्मियों को मासिक मानदेय का 5 प्रतिशत क्षेत्र भ्रमण भत्ता दिया जाए। उनका कहना है कि योजना के तहत लगातार गांवों में जाकर लाभुकों की जांच और निगरानी करनी पड़ती है, जिससे अतिरिक्त खर्च होता है।

इसके साथ ही संघ ने विभागीय कार्रवाई से संबंधित नियमों में भी बदलाव की मांग की है। संघ का कहना है कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले संबंधित कर्मियों को अपनी बात रखने और अपील करने का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके लिए विभागीय स्तर पर अपील समिति का गठन करने की मांग की गई है।
संघ के अनुसार, PMAY-G के तहत कार्यरत कई कर्मियों का कार्यकाल लगभग आठ वर्ष पूरा होने वाला है। ऐसे में उनके अनुभव को देखते हुए सेवा की अधिकतम आयु सीमा 60 वर्ष तक बढ़ाने की मांग की गई है।
धरना कार्यक्रम के दौरान संघ के नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संघ ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा करते हुए कहा है कि 17 मार्च से 20 मार्च 2026 तक राज्यभर में सांकेतिक हड़ताल की जाएगी।

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इसके बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई तो 7 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। इस स्थिति में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
संघ ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण जैसी महत्वपूर्ण योजना ग्रामीण गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए चलाई जा रही है। इसलिए योजना के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक है कि इसमें कार्यरत कर्मियों की समस्याओं और मांगों का शीघ्र समाधान किया जाए।

संघ का कहना है कि यदि सरकार कर्मियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो इससे योजना के कार्य में और तेजी आएगी तथा ग्रामीण गरीबों को समय पर आवास उपलब्ध कराया जा सकेगा। वहीं यदि मांगों की अनदेखी की जाती है तो इसका असर योजना के क्रियान्वयन पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल राज्यभर के PMAY-G कर्मी सरकार के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार उनकी मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या आंदोलन की स्थिति को टाला जा सकेगा या नहीं।
