By: Vikash Kumar ( Vicky )
झारखंड में सरकारी नौकरी को लेकर युवाओं में एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी है। लंबे समय से रिक्त पड़े पदों पर बहाली, प्रतियोगी परीक्षाओं की घोषणा और नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी के संकेतों ने राज्य के लाखों बेरोजगार युवाओं की नजरें सरकार पर टिका दी हैं। हालांकि, सच्चाई यह भी है कि सरकारी नौकरी का रास्ता अभी आसान नहीं है। सवाल यह है कि झारखंड में सरकारी नौकरी के वास्तविक आसार क्या हैं, किन युवाओं को इसका लाभ मिलेगा और बेरोजगारी से जूझ रहे युवाओं की मौजूदा स्थिति क्या है।
झारखंड में रिक्त पद और भर्ती की स्थिति
राज्य गठन के बाद से ही झारखंड में शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, राजस्व और तकनीकी विभागों में बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार विभिन्न विभागों में हजारों पद वर्षों से खाली हैं। इनमें शिक्षकों, पुलिस सिपाहियों, उत्पाद सिपाहियों, क्लर्क, पंचायत सेवक, इंजीनियर और स्वास्थ्य कर्मियों के पद प्रमुख हैं। सरकार ने कई बार इन पदों को भरने की घोषणा की है और कुछ विभागों में प्रक्रिया भी शुरू हुई है, लेकिन धीमी गति और कानूनी अड़चनों के कारण नियुक्तियां समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं पर टिकी युवाओं की उम्मीद
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC), झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और अन्य भर्ती एजेंसियों के माध्यम से होने वाली परीक्षाएं राज्य के युवाओं के लिए सबसे बड़ा सहारा हैं। हाल के वर्षों में आयोगों द्वारा परीक्षाओं के आयोजन की कोशिशें तेज हुई हैं। हालांकि, पेपर लीक, रिजल्ट में देरी और नियमों में बदलाव जैसे मुद्दों ने युवाओं का भरोसा कई बार डगमगाया है। इसके बावजूद सरकारी नौकरी की स्थिरता और सामाजिक सम्मान के कारण युवा लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं।
किन युवाओं को मिल सकती है सरकारी नौकरी
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उन्हीं युवाओं को अधिक अवसर मिलेंगे जो समय रहते परीक्षा पैटर्न के अनुसार तैयारी कर रहे हैं। खास तौर पर—
स्थानीय नीति के तहत झारखंड के मूल निवासियों को कई भर्तियों में प्राथमिकता मिल सकती है।
तकनीकी और प्रोफेशनल डिग्री रखने वाले युवाओं के लिए स्वास्थ्य, आईटी और इंजीनियरिंग सेक्टर में अवसर बढ़ने की संभावना है।
शिक्षा विभाग में प्रशिक्षित अभ्यर्थियों के लिए शिक्षक बहाली एक बड़ा मौका बन सकती है।
पुलिस और सुरक्षा बलों में युवाओं की शारीरिक दक्षता और लिखित परीक्षा दोनों महत्वपूर्ण होंगी।
झारखंड के युवाओं का बेरोजगारी से संघर्ष
राज्य के अधिकांश युवा ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं, जहां संसाधनों की कमी के कारण प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी आसान नहीं है। कोचिंग, किताबें और ऑनलाइन संसाधनों तक सीमित पहुंच युवाओं के लिए बड़ी चुनौती है। कई युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्षों तक सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर मानसिक दबाव और निराशा बढ़ जाती है। रोजगार के अभाव में बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
सरकार की योजनाएं और दावे
राज्य सरकार समय-समय पर रोजगार मेलों, कौशल विकास योजनाओं और स्वरोजगार कार्यक्रमों की घोषणा करती रही है। कौशल प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार से जोड़ने का दावा भी किया जाता है। हालांकि, युवाओं का कहना है कि निजी क्षेत्र में मिलने वाली नौकरियों में न तो स्थिरता है और न ही पर्याप्त वेतन। इसी कारण सरकारी नौकरी आज भी युवाओं की पहली पसंद बनी हुई है।
विशेषज्ञों की राय
रोजगार विशेषज्ञों के अनुसार झारखंड में सरकारी नौकरी के अवसर पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं, लेकिन प्रतिस्पर्धा कई गुना बढ़ गई है। हर एक पद के लिए हजारों अभ्यर्थी आवेदन कर रहे हैं। ऐसे में सफलता उन्हीं को मिलेगी जो नियमित अध्ययन, मॉक टेस्ट और समसामयिक विषयों पर मजबूत पकड़ बनाए रखेंगे। साथ ही युवाओं को केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर न रहकर वैकल्पिक करियर विकल्पों पर भी ध्यान देना चाहिए।
आगे का रास्ता
झारखंड के युवाओं के लिए आने वाला समय चुनौती और अवसर दोनों लेकर आ रहा है। यदि सरकार पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया अपनाती है, तो हजारों युवाओं को रोजगार मिल सकता है। वहीं युवाओं को भी धैर्य, सही दिशा और निरंतर मेहनत के साथ आगे बढ़ना होगा। सरकारी नौकरी के आसार जरूर हैं, लेकिन सफलता के लिए तैयारी और रणनीति सबसे अहम हथियार साबित होंगे।
