रांची। झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच एक बार फिर तेज़ हो गई है। राज्य में अवैध शराब कारोबार और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में गिरफ्त में आए आरोपियों से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को जेल परिसर में पहुंचकर पूछताछ की। यह पूछताछ राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई के बाद की गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण आरोपी हिरासत में लिए गए थे। दोनों एजेंसियों की संयुक्त गतिविधि ने इस मामले को नए मोड़ पर ला दिया है और आने वाले दिनों में बड़े खुलासों की उम्मीद जताई जा रही है।
ACB की कार्रवाई में सख्ती, कई अहम नाम गिरफ्तार
सूत्रों के अनुसार, ACB की टीम ने हाल ही में की गई छापेमारी में उन आरोपियों को हिरासत में लिया था, जिन पर राज्य में शराब की खरीद–फरोख्त, वितरण और लाइसेंस आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप है। बताया जा रहा है कि पकड़ में आए व्यक्तियों में कुछ सरकारी अधिकारी, स्थानीय कारोबारी और सप्लाई चेन से जुड़े लोग शामिल हैं।
ACB ने आरोपियों के खिलाफ IPC की कई धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। आरोप है कि इन लोगों ने मिलीभगत कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया और निजी लाभ कमाया।
ED की पूछताछ: मनी लॉन्ड्रिंग के तार खोजने की कोशिश
ED की टीम ने जेल में मौजूद आरोपियों से करीब दो घंटे तक सवाल–जवाब किए। सूत्र बताते हैं कि एजेंसी का फोकस इस बात पर रहा कि शराब घोटाले की कथित कमाई किस तरह चैनलाइज हुई और क्या इसका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया।
ED अब तक एकत्र दस्तावेजों, बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और कथित बिचौलियों की भूमिका को जोड़ने का प्रयास कर रही है। एजेंसी का मानना है कि यदि पूछताछ में मिल रही जानकारियां सही साबित होती हैं, तो कई नए नाम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
कई सवालों पर दबाव, आरोपी बचते दिखे
पूछताछ के दौरान आरोपियों से शराब टेंडर प्रक्रिया, लाइसेंस वितरण, कथित अवैध वसूली, और लाभार्थियों की लिस्ट से जुड़े सवाल पूछे गए।
सूत्रों के अनुसार, कुछ आरोपी सवालों से बचते दिखे और कई ने खुद को बेगुनाह बताया। हालांकि ED टीम ने उनके बयान दर्ज कर लिए हैं और जल्द ही इन बयानों की अन्य सबूतों से तुलना की जाएगी।
ACB और ED की संयुक्त कार्रवाई से जांच को मिली रफ्तार
यह पहली बार है जब दोनों एजेंसियों ने इस घोटाले में समन्वित रूप से काम किया है। ACB द्वारा बरामद दस्तावेज, मोबाइल रिकॉर्डिंग, नोटिंग और कथित अवैध लेनदेन से जुड़े डिजिटल डेटा को ED ने भी खंगालना शुरू कर दिया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जब दो अलग-अलग जांच एजेंसियां समानांतर रूप से काम करती हैं तो बड़े वित्तीय अपराधों की परतें तेजी से खुलती हैं। इस केस में भी यही उम्मीद की जा रही है।
जनता और राजनीतिक दलों की नजरें टिकीं
झारखंड में शराब कारोबार का मुद्दा हमेशा राजनीतिक चर्चा में रहा है। विपक्ष ने सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दूसरी ओर, सत्ता पक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
चूंकि मामला करोड़ों के लेनदेन से जुड़ा है, इसलिए यह प्राकृतिक है कि जनता और राजनीतिक हलकों में इस जांच को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
क्या है झारखंड शराब घोटाला?
इस मामले में आरोप है कि राज्य में शराब की ठेका व्यवस्था और वितरण नीति का गलत फायदा उठाकर कुछ अधिकारियों और कारोबारियों ने सरकारी राजस्व की हानि पहुंचाई।
बताया जाता है कि लाइसेंस जारी करने से लेकर दुकानों की सप्लाई और भुगतान प्रक्रिया तक में अनियमितताएं थीं।
कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि:
अवैध कमीशन की व्यवस्था बनाई गई
शराब की खरीद में ओवर–इनवॉइसिंग की गई
सरकारी हिस्से का राजस्व निजी जेबों में गया
बाहरी राज्यों से अनियमित सप्लाई की गई
ACB की प्रारंभिक जांच में इस मामले में करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन की आशंका जताई गई है।
आगे क्या? ED और ACB दोनों की रिपोर्टें होंगी महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ED को मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिलते हैं तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
दूसरी ओर, ACB की आगे की कार्रवाई यह तय करेगी कि राज्य की प्रशासनिक मशीनरी में किस स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ।
अगले कुछ दिनों में ED एक विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर सकती है, जबकि ACB भी अपनी चार्जशीट पर काम कर रही है। यह केस न केवल झारखंड की शराब नीति बल्कि प्रशासनिक प्रणाली पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।
झारखंड शराब घोटाला अब सिर्फ एक सामान्य जांच नहीं रहा, यह राज्य की राजनीतिक और सरकारी व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण टेस्ट केस बन गया है।
ED की पूछताछ और ACB की कार्रवाई मिलकर इस मामले को निर्णायक मोड़ की ओर ले जा सकती हैं।
आगामी हफ्तों में और कौन से खुलासे होते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

