By: Vikash Kumar (Vicky )
जनवरी के महीने में झारखंड का मौसम पूरी तरह बदल चुका है। आमतौर पर मध्यम ठंड के लिए पहचाने जाने वाले इस राज्य में इस बार सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि झारखंड किसी हिल स्टेशन जैसा नजर आने लगा है। कई जिलों में सुबह-सुबह खेतों, घास और छतों पर जमी ओस बर्फ में तब्दील होती दिखाई दी। सबसे अधिक ठंड खूंटी जिले में दर्ज की गई, जहां न्यूनतम तापमान गिरकर 2.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

ओस भी बनी बर्फ, ग्रामीण इलाकों में दिखा अनोखा नजारा
खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा और रांची के ग्रामीण इलाकों में सुबह के समय खेतों और पेड़ों पर जमी सफेद परत ने लोगों को हैरान कर दिया। स्थानीय लोग इसे “बर्फ जैसी ओस” बता रहे हैं। कई जगहों पर पानी के खुले बर्तन और पाइपों में जमी बर्फ देखी गई। इस असामान्य ठंड ने बुजुर्गों, बच्चों और दिहाड़ी मजदूरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
खूंटी में टूटा सर्दी का रिकॉर्ड
मौसम विभाग के अनुसार, खूंटी में 2.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज होना इस सीजन का अब तक का सबसे निचला स्तर है। यह तापमान सामान्य से करीब 5 से 6 डिग्री कम बताया जा रहा है। रांची का न्यूनतम तापमान भी 4 से 5 डिग्री के बीच दर्ज किया गया, जबकि पलामू, चतरा और बोकारो में भी ठंड का असर साफ देखा गया।
शीतलहर और पछुआ हवाओं का असर
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर भारत से आ रही पछुआ ठंडी हवाएं और साफ आसमान के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। रात के समय हवाओं की रफ्तार कम होने से ठंड और ज्यादा बढ़ गई। यही वजह है कि रात और सुबह के वक्त सर्दी का असर सबसे ज्यादा महसूस किया जा रहा है

जनजीवन पर सीधा असर
तेज ठंड के कारण झारखंड के कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। सुबह-सुबह बाजारों में रौनक कम दिखी, जबकि स्कूल जाने वाले बच्चों और कामकाजी लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अलाव के सहारे लोग ठंड से बचने की कोशिश कर रहे हैं। कई जगहों पर प्रशासन द्वारा चौक-चौराहों पर अलाव की व्यवस्था की गई है।
खेती और फसलों पर प्रभाव
किसानों के लिए यह ठंड दोहरी मार साबित हो सकती है। एक ओर जहां रबी फसलों को हल्की ठंड फायदा पहुंचाती है, वहीं अत्यधिक ठंड और पाला पड़ने से सब्जियों और दलहनी फसलों को नुकसान होने की आशंका है। खासकर आलू, टमाटर और हरी सब्जियों पर इसका असर पड़ सकता है।
स्वास्थ्य को लेकर अलर्ट
डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की ठंड में सर्दी-खांसी, बुखार और सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। सुबह और देर रात बाहर निकलने से बचने, गर्म कपड़े पहनने और गर्म पेय पदार्थों का सेवन करने की अपील की गई है।
अगले कुछ दिनों तक राहत नहीं
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले 2 से 3 दिनों तक ठंड से राहत मिलने की संभावना नहीं है। न्यूनतम तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है। कुछ इलाकों में घना कोहरा भी छाए रहने की आशंका जताई गई है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है।
प्रशासन की तैयारी
राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने ठंड को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। रैन बसेरों की व्यवस्था, अलाव जलाने और जरूरतमंदों को कंबल बांटने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क रहने को कहा गया है।
जनवरी में झारखंड का यह बदला हुआ मौसम लोगों के लिए चौंकाने वाला है। जहां एक ओर यह नजारा प्राकृतिक रूप से आकर्षक लग रहा है, वहीं दूसरी ओर कड़ाके की ठंड आम जनजीवन के लिए चुनौती बन चुकी है। आने वाले दिनों में मौसम पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

