By: Vikash Kumar (Vicky)
जिला मुख्यालय में आज 20 मार्च 2026 को जिला पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के परिसर में जिला स्तरीय पशु मेला सह प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री नमन प्रियेश लकड़ा ने की। इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।

इस पशु मेले का मुख्य उद्देश्य जिले के पशुपालकों और किसानों को आधुनिक पशुपालन तकनीकों, उन्नत नस्ल के पशुओं तथा सरकारी योजनाओं से जोड़ना था। कार्यक्रम के दौरान पशुपालकों को वैज्ञानिक पद्धति से पशुपालन करने, पशु-पक्षियों के संतुलित आहार, उचित रख-रखाव तथा नियमित टीकाकरण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

उपायुक्त ने अपने संबोधन में कहा कि जिला स्तरीय पशु मेला किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां उन्हें नई तकनीक, आधुनिक उपकरण और सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही जगह पर मिलती है। उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय पशुपालन को अपनाना आज के समय की आवश्यकता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता भी सुनिश्चित होती है।
कार्यक्रम में राज्य सरकार की मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के साथ-साथ केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM), एलएचडीसीपी, एनएआईपी तथा एबीआईपी-एसएस सॉर्टेड सीमेन मादा पशु गर्भाधान योजना के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई। पशुपालकों को इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।

विशेष रूप से एलएचडीसीपी के अंतर्गत पशुओं में फैलने वाली गंभीर बीमारियों जैसे एफएमडी (खुरपका-मुंहपका), पीपीआर, ब्रूसेलोसिस, एलएसडी और सीएसएफ से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण कराने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित टीकाकरण से पशुओं की मृत्यु दर कम होती है और उत्पादन क्षमता बढ़ती है।
कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिले के किसानों और रविंद्र नाथ टैगोर कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) सुजनी का एक्सपोजर विजिट कराया जाए। उन्होंने कहा कि इस विजिट के माध्यम से किसानों और छात्रों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, नई फसल प्रजातियों और पशुपालन की वैज्ञानिक विधियों को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिलेगा।

मेले में विभिन्न विभागों द्वारा कई स्टॉल लगाए गए थे, जहां पशुपालकों को पशुओं के पोषण, दवाइयों, टीकाकरण, प्रबंधन और बीमारी की रोकथाम से संबंधित जानकारी दी गई। इसके अलावा उन्नत नस्ल के पशुओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिससे किसानों को बेहतर नस्लों के बारे में जानकारी मिली और उन्हें अपनाने के लिए प्रेरणा मिली।
इस अवसर पर उपायुक्त श्री नमन प्रियेश लकड़ा द्वारा मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत विभिन्न प्रखंडों के लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण भी किया गया। सारवां प्रखंड में बत्तख पालन हेतु 1 और बकरी पालन हेतु 2 लाभुकों को सहायता दी गई। वहीं सारठ प्रखंड में 2 लाभुकों को बकरी पालन के लिए सहायता प्रदान की गई। देवीपुर प्रखंड में 6 लाभुकों को बत्तख पालन तथा देखण्ड प्रखंड में 12 लाभुकों को बत्तख पालन हेतु परिसंपत्तियां वितरित की गईं।

इसके अलावा लाभुकों को ब्रायलर कुक्कुट पालन से संबंधित संसाधन भी उपलब्ध कराए गए, जिससे वे स्वरोजगार के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकें। उपायुक्त ने लाभुकों से अपील की कि वे इन योजनाओं का सही तरीके से उपयोग करें और अपने जीवन स्तर को बेहतर बनाएं।
कार्यक्रम के अंत में उपायुक्त समेत अन्य अतिथियों ने पशु मेला में लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया और प्रदर्शनी में लाए गए पशुओं का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन नियमित रूप से किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।

इस अवसर पर जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला उद्यान पदाधिकारी, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
यह पशु मेला न केवल किसानों के लिए ज्ञानवर्धक साबित हुआ, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने और आधुनिक कृषि एवं पशुपालन को अपनाने के लिए प्रेरित भी किया।

