By: Vikash Kumar ( Vicky )
साल 2025 के अंतिम दिनों में एक बार फिर देश को झकझोर देने वाला दर्दनाक हादसा सामने आया है। कर्नाटक में हुए भीषण बस हादसे में कम से कम 17 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यह हादसा इतना भयावह था कि घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दुर्घटना के बाद प्रशासन और राहत एजेंसियों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए बचाव कार्य शुरू किया।
कैसे हुआ हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह बस कर्नाटक के एक प्रमुख राजमार्ग पर तेज रफ्तार में चल रही थी। अचानक बस चालक का नियंत्रण बिगड़ गया और बस सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बस कई बार पलटी, जिससे यात्रियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग सबसे पहले मदद के लिए पहुंचे और घायलों को बाहर निकालने का प्रयास किया।
मौके पर राहत और बचाव कार्य
हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस, एंबुलेंस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत नाजुक बनी हुई है। जिला प्रशासन ने मृतकों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है और उनके परिजनों को सूचित किया जा रहा है। अस्पतालों में अतिरिक्त डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को तैनात किया गया है ताकि घायलों का बेहतर इलाज हो सके।

मुख्यमंत्री और नेताओं की प्रतिक्रिया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मुआवजे का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हादसे की विस्तृत जांच के आदेश भी दिए हैं ताकि दुर्घटना के असली कारणों का पता लगाया जा सके। वहीं, केंद्र सरकार और अन्य राजनीतिक नेताओं ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त किया है।
क्या थी हादसे की वजह?
प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। हालांकि, तकनीकी खराबी, खराब सड़क या चालक की थकान जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे सफर के दौरान ड्राइवरों को पर्याप्त आराम न मिलना भी इस तरह की दुर्घटनाओं का कारण बनता है।
सड़क सुरक्षा पर फिर सवाल
यह हादसा एक बार फिर देश में सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आए दिन हो रहे सड़क हादसों के बावजूद नियमों का सख्ती से पालन नहीं हो पा रहा है। ओवरस्पीडिंग, ओवरलोडिंग और यातायात नियमों की अनदेखी जैसी समस्याएं लगातार जानलेवा साबित हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें सख्ती से लागू करना भी जरूरी है।
आंकड़े जो चिंता बढ़ाते हैं
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल हजारों लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं। इनमें से बड़ी संख्या बस और ट्रक दुर्घटनाओं की होती है। कर्नाटक जैसे विकसित राज्य में इस तरह का हादसा होना यह दर्शाता है कि सड़क सुरक्षा को लेकर अभी भी कई खामियां हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी
हादसे के चश्मदीदों ने बताया कि टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि दूर तक सुनाई दी। कुछ यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई लोग बस के अंदर फंसे रह गए। स्थानीय लोगों ने बिना देर किए बचाव कार्य शुरू किया, जिससे कई जिंदगियां बचाई जा सकीं।
आगे की कार्रवाई
प्रशासन ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं और बस कंपनी से भी जवाब मांगा गया है। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि घायलों को हर संभव सहायता मिले।
सबक लेने की जरूरत
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक सड़क हादसों में लोगों की जान जाती रहेगी। जरूरत है कि सरकार, प्रशासन और आम जनता मिलकर सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दें। नियमों का पालन, सुरक्षित ड्राइविंग और जागरूकता ही ऐसे हादसों को रोक सकती है।
