तिरुवनंतपुरम। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शुक्रवार को दक्षिण रेलवे पर तीखी आलोचना की है। उन्होंने एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के उद्घाटन समारोह के दौरान छात्रों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा गीत गवाने पर नाराजगी जताई। विजयन ने इस कदम को “संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन” और “भारत की धर्मनिरपेक्ष भावना पर हमला” बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे जैसी राष्ट्रीय संस्था को किसी सांप्रदायिक संगठन की विचारधारा से जोड़ना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण रेलवे ने एक सरकारी कार्यक्रम को “वैचारिक प्रचार का मंच” बना दिया है।
घटना कैसे सामने आई?
दरअसल, 8 नवंबर को एर्नाकुलम जंक्शन से बेंगलुरु के लिए नई वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत हुई थी। उद्घाटन कार्यक्रम में कई स्थानीय स्कूली छात्रों को आमंत्रित किया गया था, जिन्हें सांस्कृतिक प्रस्तुति देने के लिए कहा गया था।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने एक गीत प्रस्तुत किया, जिसे विपक्षी दलों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने RSS के “संघ प्रार्थना” गीत के रूप में पहचाना।
वीडियो सामने आने के बाद, सोशल मीडिया पर “रेलवे का भगवाकरण” (saffronisation of Railways) ट्रेंड करने लगा। विपक्षी दलों ने रेलवे पर राजनीतिक एजेंडा चलाने का आरोप लगाया।
पिनाराई विजयन का बयान
मुख्यमंत्री विजयन ने कहा—
“रेलवे जैसी सार्वजनिक संस्था को किसी धार्मिक या वैचारिक संगठन के साथ जोड़ना भारतीय संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ है। इस तरह की गतिविधियाँ देश की एकता, अखंडता और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों को कमजोर करती हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
विजयन ने आगे कहा—
“केरल धर्मनिरपेक्षता की भूमि है। यहां हर धर्म, जाति और समुदाय के लोग समानता और सम्मान के साथ रहते हैं। सरकारी कार्यक्रमों में किसी एक विचारधारा को थोपना अस्वीकार्य है।”
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
विजयन के बयान के बाद केरल की राजनीति गरमा गई है।
कांग्रेस ने इस घटना को “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रचार” बताया और कहा कि केंद्र सरकार सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।
भाजपा ने इन आरोपों को निराधार बताया और कहा कि “यह सिर्फ एक देशभक्ति गीत था, जिसे गलत तरीके से RSS गीत बताया जा रहा है।”
केरल बीजेपी अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने कहा—
“मुख्यमंत्री विजयन RSS से इतनी नफरत क्यों करते हैं? हर देशभक्ति गीत को संघ से जोड़ना उनकी असहिष्णुता दिखाता है।”
वहीं, कांग्रेस नेता वी. डी. सतीशन ने कहा—
“रेलवे जैसी संस्था अगर संघ विचारधारा को बढ़ावा देने में लगी है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।”
धर्मनिरपेक्षता पर बहस फिर तेज
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में सरकारी संस्थाओं में राजनीतिक और वैचारिक दखल को लेकर बहस जारी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक संस्थानों को “राजनीतिक या धार्मिक प्रभावों” से दूर रहना चाहिए ताकि उनकी निष्पक्षता बनी रहे।
राजनीतिक विश्लेषक के. जी. गोपीनाथन का कहना है—
“केरल जैसे राज्य में जहां शिक्षा और सामाजिक चेतना का स्तर ऊंचा है, वहां इस तरह की घटनाएं जनता के बीच असंतोष पैदा कर सकती हैं। यह जरूरी है कि रेलवे इस मामले पर स्पष्टता दे।”
रेलवे का पक्ष
इस विवाद पर दक्षिण रेलवे ने अपनी सफाई दी है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि—
“कार्यक्रम में जो गीत प्रस्तुत किया गया, वह एक पारंपरिक देशभक्ति गीत था, जिसका किसी संगठन से संबंध नहीं था। छात्रों ने अपनी मर्जी से यह गीत चुना था, न कि रेलवे ने।”
हालांकि, विपक्ष इस स्पष्टीकरण को स्वीकार करने को तैयार नहीं है और रेलवे से आधिकारिक जांच रिपोर्ट जारी करने की मांग कर रहा है।
केरल सरकार ने भेजी रिपोर्ट की मांग
सूत्रों के मुताबिक, केरल सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
राज्य सरकार ने कहा है कि शैक्षणिक संस्थानों के बच्चों को किसी वैचारिक कार्यक्रम में शामिल करना “शिक्षा नीति के उल्लंघन” के समान है।
मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले को हल्के में नहीं लेगी।
उन्होंने चेतावनी दी—
> “यदि केंद्र सरकार या रेलवे इस पर कार्रवाई नहीं करता, तो राज्य सरकार इस मुद्दे को संसद तक उठाएगी।”
एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत ट्रेन उद्घाटन कार्यक्रम का यह विवाद राजनीतिक और वैचारिक टकराव में बदल गया है।
जहां एक ओर भाजपा इसे “देशभक्ति की भावना” बता रही है, वहीं विपक्ष इसे “संविधान और धर्मनिरपेक्षता पर हमला” मान रहा है।
अब देखना होगा कि रेलवे इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई करती है या नहीं।

