By: Vikash Kumar (Vicky)
कोलकाता के आनंदपुर इलाके में स्थित एक मोमो फैक्ट्री में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे को लेकर अब सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस घटना को सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला है।

अमित शाह ने सवाल उठाया, “मोमो फैक्ट्री में किसका पैसा लगा है?” उन्होंने आरोप लगाया कि यह हादसा कोई साधारण दुर्घटना नहीं, बल्कि अवैध कारोबार और सरकारी संरक्षण का नतीजा है। शाह का कहना है कि राज्य सरकार इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि इस अग्निकांड में 25 लोगों की मौत हो चुकी है और 27 लोग अब भी लापता हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि जिस इमारत में मोमो फैक्ट्री चल रही थी, वहां न तो फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम थे और न ही किसी प्रकार की वैध अनुमति। इसके बावजूद लंबे समय से वहां अवैध रूप से कारोबार चलाया जा रहा था। शाह ने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत के बिना ऐसा संभव नहीं है।

अमित शाह ने ममता बनर्जी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल में भ्रष्टाचार अब सिस्टम का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि “यह हादसा नहीं, हत्या है। जिन लोगों की जान गई है, उनकी मौत के जिम्मेदार वे लोग हैं जिन्होंने अवैध फैक्ट्री को संरक्षण दिया।”
गृह मंत्री ने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार मृतकों की संख्या को छिपा रही है और लापता लोगों के आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा। उन्होंने सवाल किया कि जब 27 लोग लापता हैं, तो सरकार क्यों चुप है? आखिर उन परिवारों को जवाब कौन देगा, जिनके अपने इस हादसे के बाद से घर नहीं लौटे?

इस घटना को लेकर भाजपा ने राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह मामला केवल एक फैक्ट्री में आग लगने का नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की बदहाली और भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुका है।
वहीं तृणमूल कांग्रेस ने अमित शाह के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार इस दुखद घटना पर राजनीति कर रही है और बिना तथ्यों के आरोप लगाए जा रहे हैं। टीएमसी नेताओं का दावा है कि राज्य सरकार ने राहत और बचाव कार्य में कोई कोताही नहीं बरती और मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी। भाजपा नेताओं का कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच होनी है, तो इसकी जिम्मेदारी किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मोमो फैक्ट्री में लंबे समय से अवैध गतिविधियां चल रही थीं। आसपास के निवासियों ने कई बार शिकायतें भी की थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि फैक्ट्री में गैस सिलेंडरों और ज्वलनशील सामग्री का खुलेआम इस्तेमाल किया जाता था, जिससे हादसे का खतरा लगातार बना हुआ था।

अग्निकांड के बाद मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। संकरी गलियों और अव्यवस्थित निर्माण के कारण राहत कार्य में देरी हुई, जिससे जान-माल का नुकसान और बढ़ गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। अमित शाह के तीखे हमलों से साफ है कि भाजपा इस अग्निकांड को बंगाल में भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था के सवाल से जोड़कर जनता के बीच ले जाना चाहती है।
फिलहाल, कोलकाता मोमो फैक्ट्री अग्निकांड ने न केवल कई परिवारों को उजाड़ दिया है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी आग लगा दी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में जांच किस दिशा में जाती है और क्या पीड़ितों को वास्तव में न्याय मिल पाता है या नहीं।

