By: Vikash Kumar (Vicky)
गाजियाबाद के साहिबाबाद थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। भारत सिटी सोसायटी में रहने वाली तीन नाबालिग सगी बहनों ने एक साथ नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे समाज में मातम पसरा हुआ है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें एक ऑनलाइन कोरियन गेम की लत का शिकार थीं, जिसने धीरे-धीरे उनके मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर दिया।

घटना रविवार देर शाम की बताई जा रही है। सोसायटी के लोगों के अनुसार, अचानक तेज आवाज सुनाई दी, जब लोग नीचे पहुँचे तो तीनों बच्चियाँ लहूलुहान हालत में पड़ी थीं। तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन अस्पताल पहुँचने से पहले ही तीनों की मौत हो चुकी थी। मृतक बहनों की उम्र क्रमशः 12, 14 और 16 वर्ष बताई जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार मूल रूप से मध्यम वर्गीय है और माता-पिता दोनों कामकाजी हैं। प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि तीनों बहनें पिछले कुछ महीनों से एक ऑनलाइन कोरियन गेम खेल रही थीं और धीरे-धीरे उसकी लत इतनी बढ़ गई कि वे दिन-रात उसी में डूबी रहती थीं। परिजनों ने कई बार उन्हें मोबाइल इस्तेमाल कम करने की समझाइश दी थी, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर होती चली गई।

पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, लेकिन मोबाइल फोन की जांच में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जो इस गेम से जुड़े मानसिक दबाव की ओर इशारा करते हैं। पुलिस का मानना है कि यह गेम खिलाड़ियों को मानसिक रूप से कमजोर कर देता है और उन्हें खतरनाक चुनौतियों की ओर धकेलता है।
घटना के बाद सोसायटी में रहने वाले लोग सदमे में हैं। पड़ोसियों का कहना है कि तीनों बहनें पढ़ाई में अच्छी थीं और सामान्य व्यवहार करती थीं। किसी को भी अंदाजा नहीं था कि वे अंदर ही अंदर इतने गहरे तनाव से गुजर रही हैं। एक पड़ोसी ने बताया कि कुछ दिन पहले ही तीनों को मोबाइल पर देर रात तक गेम खेलते देखा गया था।

इस घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन गेमिंग और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि अत्यधिक गेमिंग बच्चों के दिमाग पर गहरा असर डालती है। जब बच्चे आभासी दुनिया और असली जीवन के बीच फर्क नहीं कर पाते, तब ऐसी घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और साइबर सेल की मदद से उस कोरियन गेम की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि क्या यह गेम भारत में प्रतिबंधित है या इसके कंटेंट में किसी तरह की आपत्तिजनक चुनौतियाँ शामिल हैं। पुलिस परिवार के सदस्यों, दोस्तों और शिक्षकों से भी पूछताछ कर रही है।

इस दुखद घटना के बाद प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। बच्चों से खुलकर बात करें और अगर उनमें व्यवहार में कोई बदलाव नजर आए तो तुरंत विशेषज्ञ की मदद लें। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते संवाद और सही मार्गदर्शन से ऐसी त्रासदियों को रोका जा सकता है।
यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक स्तर पर भी जरूरी हो गई है। जरूरत इस बात की है कि माता-पिता, स्कूल और समाज मिलकर बच्चों को सुरक्षित और संतुलित डिजिटल माहौल प्रदान करें, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

