By: Vikash Kumar (Vicky)
बिहार की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के नाम से जुड़ी संपत्ति को लेकर विवाद गरमाया है। पटना के कौटिल्य नगर में बन रहे लालू यादव के नए बंगले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय युवाओं ने राज्य के उपमुख्यमंत्री तथा राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा को एक पत्र लिखा है, जिसमें निर्माणाधीन इस बंगले और संबंधित जमीन की जांच कराने की मांग की गई है। यह विवाद पटना की सियासी हलकों में तब उभरा जब जदयू (जनता दल यूनाइटेड) के एक प्रमुख एमएलसी और पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार ने लालू यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता कभी साधारण जीवन जीते थे, आज वही पटना के सबसे महंगे इलाकों में भव्य आवास बना रहे हैं और इस संपत्ति के स्रोत व नियमों का पालन जांच का विषय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं है बल्कि नैतिकता, संपत्ति के स्रोत और भूमि नियमों से जुड़ा बड़ा राजनीतिक मुद्दा है।

नीरज कुमार की मांग के बाद सामाजिक कार्यकर्ता विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा ने भी इसी संदर्भ में उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा को पत्र लिखकर इस मामले में निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। बयान में आरोप लगाया गया है कि लालू यादव के इस नए बंगले के निर्माण के पीछे जमीन के अवैध सौदों और नियमों के उल्लंघन का शक है, जिस पर सरकार को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की संपत्ति की जांच आम जनहित में की जा सकती है, तो पूर्व मुख्यमंत्री के नए आवास और जमीन के मालिकाना हक के स्रोत और प्राप्ति की भी भली-भांति जांच होनी चाहिए। पत्र में यह स्पष्ट किया गया कि यह मांग किसी पार्टी विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय, पारदर्शिता और सामाजिक विश्वास को बनाए रखने के लिए है।
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा का बयान
इस संदर्भ में जब उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि “यदि किसी नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता या किसी राजनीतिक दल के माध्यम से आवेदन या ठोस शिकायत मिलेगी, तो विभाग नियमों और कानून के अंतर्गत जांच कराएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार भूमि माफिया और अवैध जमीन सौदों के खिलाफ अभियान चला रही है और यह प्रक्रिया सभी के लिए समान रूप से लागू होगी।
विजय सिन्हा ने यह भी संकेत दिया कि इसके लिए कोई भी दबाव या राजनीतिक रंग नहीं डाला जाएगा, बल्कि यदि कोई ठोस प्रमाण या आवेदन मिलता है, तो जांच निश्चित रूप से होगी। उन्होंने कहा कि भूमि सुधार विभाग जनता के हित में काम कर रहा है और विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई हो।
राजद और विपक्ष की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर RJD नेताओं ने उपमुख्यमंत्री के बयान को राजनीतिक उत्पीड़न करार दिया है। राजद प्रवक्ता ने कहा कि यह विवाद राज्य की सियासी रणनीति और विकास कार्यों से ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि आरोपों में कोई सच्चाई है तो जांच एजेंसियें पहले ही जांच कर चुकी हैं या कर सकती हैं, लेकिन इसे राजनीतिक ढंग से उठाया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता विकास कार्यों और जनता के हित में होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत राजनेताओं पर आरोप लगाने में।
राजद नेताओं ने यह भी कहा कि लालू यादव और उनके परिवार की संपत्ति से जुड़े किसी भी सवाल को यदि जनता की अपेक्षा और तथ्यों के आधार पर उठाया जाता है, तो वह जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में है और स्वतंत्र संस्थाओं द्वारा विवेचना होनी चाहिए।
भू-माफिया और भूमि सुधार पर सियासी पृष्ठभूमि
यह विवाद उस समय और अधिक तेज हुआ है जब बिहार सरकार भूमि माफिया, जमीन के दलालों और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ अभियान चला रही है। उपमुख्यमंत्री के रवैये पर कुछ राजस्व अधिकारियों ने भी नाराज़गी जताई है और कहा है कि सार्वजनिक बैठकों में दिए गए बयानों से प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। हालांकि विजय सिन्हा ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विभागीय अधिकारियों को सही दिशा में काम करना चाहिए और किसी भी अवैध गतिविधि पर सख्त कार्रवाई होगी।
राजनीतिक प्रभाव
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि लालू यादव के नए बंगले का मुद्दा सिर्फ संपत्ति विवाद नहीं बल्कि आगामी चुनावों और भविष्य की राजनीतिक योजना का भी सूचक है। इस मुद्दे को दोनों पक्ष अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यदि जांच होती है और किसी भी नियम उल्लंघन का प्रमाण मिलता है, तो इसका राजनीतिक और कानूनी प्रभाव व्यापक होगा। हालांकि इसके विपरीत, यदि यह केवल राजनीतिक हथियारबंद आरोपों का हिस्सा है, तो इसका असर जनता की धारणा पर निर्भर करेगा।
यादव के नए बंगले को लेकर उठे विवाद और जांच की मांग बिहार राजनीतिक परिदृश्य में एक नया मोड़ लेकर आई है। सरकार और विपक्ष के बीच जारी यह बहस आगामी समय में और गहराई से सामने आ सकती है, जिससे राज्य की राजनीति में और उबाल देखने को मिल सकता है।
