कोलकाता । फुटबॉल जगत के सबसे बड़े सितारों में शामिल अर्जेंटीना के दिग्गज खिलाड़ी लियोनेल मेसी से जुड़ा कार्यक्रम कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में उस वक्त विवादों में घिर गया, जब भारी भीड़ और अव्यवस्थित प्रबंधन के कारण स्थिति बेकाबू हो गई। मेसी को देखने के लिए उमड़े हजारों प्रशंसक स्टेडियम के बाहर और अंदर घंटों परेशान होते रहे, जिसके बाद यह मामला कानून-व्यवस्था की बड़ी चूक के रूप में सामने आया।

हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस और प्रशासन को भीड़ नियंत्रित करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। कई दर्शक स्टेडियम में प्रवेश ही नहीं कर सके, जबकि कुछ अंदर पहुंचकर भी मेसी की झलक से वंचित रह गए।
फुटबॉल प्रेमियों में गुस्सा, सोशल मीडिया पर फूटा आक्रोश
मेसी के कार्यक्रम को लेकर देशभर में जबरदस्त उत्साह था। पश्चिम बंगाल सरकार और आयोजन समिति की ओर से इसे ऐतिहासिक आयोजन बताया जा रहा था, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं चरमराती नजर आईं।
कार्यक्रम के दौरान टिकट व्यवस्था, प्रवेश गेट, सुरक्षा जांच और बैठने की व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित रही। इसका नतीजा यह हुआ कि कई जगहों पर धक्का-मुक्की, अफरा-तफरी और नाराजगी देखने को मिली।
सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने आयोजन समिति पर सवाल उठाते हुए इसे “पूरी तरह मैनेजमेंट फेल्योर” करार दिया। कई लोगों ने कहा कि इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय हस्ती के कार्यक्रम के लिए न तो पर्याप्त सुरक्षा थी और न ही भीड़ नियंत्रण की ठोस योजना।
ममता बनर्जी का संज्ञान, उच्च स्तरीय जांच के आदेश
मामला तूल पकड़ने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा संज्ञान लिया। उन्होंने अधिकारियों को उच्च स्तरीय जांच के आदेश देते हुए कहा कि कार्यक्रम में हुई चूक गंभीर है और इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने उन प्रशंसकों से भी खुले तौर पर माफी मांगी, जो मेसी को देखने के बावजूद कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन सके। ममता बनर्जी ने कहा कि,
“यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि फुटबॉल प्रेमियों को निराशा हाथ लगी। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में इस तरह की गलती न दोहराई जाए।”
क्या मेसी इवेंट का मैनेजमेंट पूरी तरह फेल रहा?
इस सवाल पर अब राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के कार्यक्रम में भीड़ प्रबंधन सबसे अहम पहलू होता है, लेकिन इस आयोजन में उसी पर सबसे ज्यादा लापरवाही दिखाई दी।
दर्शकों की अनुमानित संख्या के अनुसार प्रवेश गेट कम थे
टिकट सत्यापन की प्रक्रिया धीमी रही
सुरक्षा कर्मियों और वालंटियर्स की संख्या अपर्याप्त थी
इमरजेंसी प्रबंधन की कोई स्पष्ट व्यवस्था नजर नहीं आई
इन सभी कारणों ने मिलकर आयोजन को अव्यवस्था में बदल दिया।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू
घटना के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। बीजेपी और अन्य दलों ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रचार पर ज्यादा ध्यान दिया, लेकिन ज़मीनी व्यवस्थाओं को नजरअंदाज कर दिया।
वहीं, सत्तारूढ़ दल की ओर से कहा गया कि अप्रत्याशित भीड़ के कारण स्थिति बिगड़ी और इसे जानबूझकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
फुटबॉल की राजधानी कोलकाता की छवि पर सवाल
कोलकाता को भारत की फुटबॉल राजधानी कहा जाता है। ऐसे में लियोनेल मेसी जैसे खिलाड़ी से जुड़ा आयोजन अव्यवस्था की भेंट चढ़ना शहर की छवि पर भी सवाल खड़े करता है।
खेल प्रेमियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
आगे क्या?
मुख्यमंत्री द्वारा जांच के आदेश के बाद अब सबकी नजर रिपोर्ट पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि दोषियों पर कार्रवाई होगी और भविष्य में बड़े आयोजनों के लिए ठोस और पारदर्शी प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी।
लियोनेल मेसी का कार्यक्रम फुटबॉल प्रेमियों के लिए यादगार होना चाहिए था, लेकिन अव्यवस्था और कुप्रबंधन के कारण यह एक विवादास्पद आयोजन बन गया। अब सवाल सिर्फ जिम्मेदारी तय करने का नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी चूक दोहराई न जाए—इसका है।
