By: Vikash Kumar (Vicky)
हिंदू पंचांग में माघ महीना अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। इस महीने का संबंध स्नान, दान, जप-तप और सात्विक जीवनशैली से होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ मास में खान-पान को लेकर विशेष नियम बताए गए हैं। इन्हीं नियमों में से एक है माघ महीने में मूली का सेवन न करना। ज्योतिष और आयुर्वेद दोनों ही दृष्टिकोण से इसके पीछे गहरे कारण बताए गए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि माघ में मूली खाना क्यों वर्जित माना जाता है।

माघ माह का धार्मिक महत्व
माघ मास को साधना और शुद्धि का महीना कहा जाता है। इस दौरान गंगा स्नान, भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि माघ में किया गया छोटा सा पुण्य भी कई गुना फल देता है। ऐसे में इस महीने सात्विक आहार अपनाने पर जोर दिया गया है ताकि तन और मन दोनों शुद्ध रहें।
ज्योतिष शास्त्र में मूली को क्यों माना गया तामसिक
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मूली तामसिक प्रवृत्ति की सब्जी मानी जाती है। माघ माह में तामसिक भोजन से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह मन को अशांत करता है और साधना में बाधा बन सकता है। इस महीने व्यक्ति को संयम, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की ओर बढ़ना चाहिए, जबकि मूली का प्रभाव इसके विपरीत माना गया है।
ग्रहों पर मूली के प्रभाव की मान्यता
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार मूली का संबंध राहु और केतु जैसे छाया ग्रहों से जोड़ा जाता है। माघ मास में सूर्य देव का प्रभाव बढ़ जाता है और इस समय राहु-केतु से जुड़ी चीजों का सेवन करने से ग्रह दोष बढ़ने की आशंका मानी जाती है। यही कारण है कि माघ में मूली खाने से मानसिक भ्रम, तनाव और निर्णय क्षमता में कमी आने की बात कही जाती है।
आयुर्वेद के अनुसार माघ में मूली नुकसानदेह क्यों
आयुर्वेद के अनुसार माघ मास में शरीर की पाचन अग्नि कमजोर हो सकती है। मूली की तासीर तीखी और भारी होती है, जिसे पचाने में अधिक ऊर्जा लगती है। इससे गैस, एसिडिटी, पेट दर्द और जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। खासकर ठंड के मौसम में मूली का अधिक सेवन शरीर में वात दोष को बढ़ा सकता है।

धार्मिक कथाओं से जुड़ी मान्यता
कुछ धार्मिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि माघ मास में मूली का सेवन करने से व्यक्ति को पुण्य के स्थान पर पाप का भागी बनना पड़ सकता है। हालांकि यह आस्था से जुड़ी बात है, लेकिन शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करने से व्यक्ति मानसिक रूप से अधिक संतुलित रहता है।
माघ माह में किन चीजों का सेवन माना गया शुभ
माघ मास में तिल, गुड़, खिचड़ी, घी, दूध, फल और सात्विक भोजन का सेवन शुभ माना गया है। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और मन शांत रहता है। यही कारण है कि माघ स्नान के बाद खिचड़ी और तिल से बनी चीजों का दान और सेवन करने की परंपरा है।
क्या सभी को माघ में मूली नहीं खानी चाहिए
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जो लोग व्रत, जप-तप या धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं, उन्हें विशेष रूप से मूली से परहेज करना चाहिए। सामान्य जीवन जीने वाले लोगों के लिए यह आस्था और परंपरा का विषय है। कोई व्यक्ति स्वास्थ्य कारणों से यदि मूली खाता है, तो यह उसका व्यक्तिगत निर्णय होता है।
आधुनिक जीवन में मान्यता का महत्व
आज के समय में हर व्यक्ति इन नियमों का पालन करे, यह जरूरी नहीं। लेकिन परंपराओं के पीछे छिपे संतुलित जीवन और अनुशासन के संदेश को समझना आवश्यक है। माघ में मूली न खाने की परंपरा भी शरीर और मन को विश्राम देने का एक तरीका मानी जा सकती है।
यह लेख ज्योतिष शास्त्र, आयुर्वेद और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है। किसी भी प्रकार का खान-पान संबंधी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

