By: Vikash Kumar (Vicky)
Magh Mela 2026 की शुरुआत पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर हो चुकी है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगने वाला माघ मेला हिंदू धर्म में आस्था, तप और आध्यात्मिक साधना का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान, दान और तप के लिए यहां पहुंचते हैं। साल 2026 में माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलेगा। कुल 44 दिनों तक चलने वाले इस मेले में कुछ विशेष तिथियां ऐसी होती हैं, जिन पर संगम स्नान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
हिंदू धर्म में माघ मेले का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार माघ मास को सभी महीनों में सबसे अधिक पुण्यदायी माना गया है। इस महीने में किया गया स्नान, दान और जप व्यक्ति के पापों का नाश करता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। मान्यता है कि माघ मास में संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के दोष समाप्त हो जाते हैं और देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसी कारण साधु-संत, कल्पवासी और गृहस्थ बड़ी संख्या में प्रयागराज पहुंचते हैं।
पौष पूर्णिमा से होती है माघ मेले की शुरुआत
माघ मेले की शुरुआत पौष पूर्णिमा से मानी जाती है। वर्ष 2026 में पौष पूर्णिमा 3 जनवरी को पड़ी, इसी दिन से कल्पवास और संगम स्नान की परंपरा शुरू हो गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पौष पूर्णिमा का स्नान जीवन में शुभता और शांति लाता है। इसके बाद पूरे माघ मास तक श्रद्धालु संगम तट पर निवास कर धर्म-कर्म में लीन रहते हैं।
Magh Mela 2026: संगम स्नान के लिए 6 सबसे शुभ तिथियां
माघ मेले के दौरान कुछ विशेष पर्व ऐसे होते हैं, जिन पर स्नान का महत्व अत्यंत बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में संगम स्नान के लिए कुल 6 प्रमुख तिथियां रहेंगी।
पौष पूर्णिमा – 3 जनवरी 2026
मकर संक्रांति – 14 जनवरी 2026
मौनी अमावस्या – 18 जनवरी 2026
बसंत पंचमी – 23 जनवरी 2026
माघी पूर्णिमा – 1 फरवरी 2026
महाशिवरात्रि – 15 फरवरी 2026
इन तिथियों पर संगम में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

स्नान के लिए सबसे शुभ मुहूर्त क्या रहेगा
माघ मेले के दौरान स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सर्वोत्तम माना गया है। सुबह लगभग 4:00 बजे से 5:30 बजे तक का समय स्नान के लिए अत्यंत शुभ होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस समय देवताओं का पृथ्वी पर वास होता है, जिससे स्नान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। स्नान के बाद दान, जप और ध्यान करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं।
माघ माह में किन देवताओं की पूजा मानी जाती है श्रेष्ठ
माघ मास में भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु की उपासना करने से जीवन में स्थिरता, सुख और समृद्धि आती है। वहीं सूर्य देव की पूजा से आत्मबल बढ़ता है और कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। माघ मेले के दौरान सूर्य को अर्घ्य देना, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना और दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
माघ मेले में दान का विशेष महत्व
माघ मास में किया गया दान कभी निष्फल नहीं जाता। इस दौरान अन्न, वस्त्र, कंबल, तिल, घी और धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि माघ मेले में किया गया दान सीधे देव लोक तक पहुंचता है और पूर्व जन्मों के पापों का नाश करता है।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित सामान्य जानकारी पर आधारित है। तिथियों और मुहूर्त में स्थान और पंचांग के अनुसार अंतर संभव है। किसी भी धार्मिक कर्म से पहले स्थानीय पंचांग या विद्वान से सलाह अवश्य लें।
