By: Vikash Kumar (Vicky)
Maha Shivratri 2026 के पावन अवसर पर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। महादेव का स्वरूप सभी देवताओं से अलग और अनोखा है। उनके गले में लिपटा सांप, सिर पर तीसरा नेत्र, हाथों में त्रिशूल और डमरू, वाहन के रूप में नंदी और पूरे शरीर पर भस्म का लेप उनके दिव्य और रहस्यमय रूप को दर्शाता है। शिवजी का यह स्वरूप केवल बाहरी नहीं बल्कि गहरे आध्यात्मिक और पौराणिक अर्थों से जुड़ा हुआ है, जिसे जानना भक्तों के लिए बेहद रोचक और प्रेरणादायक माना जाता है।

कौनसा नाग रहता है भगवान शिव के गले में
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव के गले में लिपटा हुआ नाग “वासुकी नाग” माना जाता है। वासुकी नाग नागों के राजा माने जाते हैं और समुद्र मंथन के समय भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा था। शिवजी के गले में वासुकी नाग का होना इस बात का प्रतीक है कि महादेव ने भय और मृत्यु पर नियंत्रण प्राप्त किया है। सांप को काल और विनाश का प्रतीक माना जाता है, इसलिए शिवजी के गले में नाग का होना उनके महाकाल स्वरूप को दर्शाता है।

महादेव के गले में नाग पहनने की पौराणिक कथा
एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार जब समुद्र मंथन हुआ तो उसमें से विष भी निकला, जिसे संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर लिया और नीलकंठ कहलाए। उस समय नागराज वासुकी भी मंथन में शामिल थे और बाद में उन्होंने शिवजी की भक्ति में स्वयं को उनके गले में स्थान देने की इच्छा जताई।

शिवजी ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें अपने गले में धारण कर लिया। यह कथा त्याग, भक्ति और शक्ति का प्रतीक मानी जाती है।

शिवजी के अद्भुत स्वरूप के पीछे छिपे आध्यात्मिक अर्थ
भगवान शिव के शरीर पर भस्म का लेप यह दर्शाता है कि संसार की हर वस्तु नश्वर है। उनके सिर पर तीसरा नेत्र ज्ञान और सत्य का प्रतीक है, जबकि त्रिशूल तीनों लोकों और तीनों गुणों पर नियंत्रण का संकेत देता है।

डमरू सृष्टि की ध्वनि और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। शिवजी का पूरा स्वरूप हमें जीवन के गहरे आध्यात्मिक संदेश देता है कि अहंकार त्यागकर सादगी और संतुलन के साथ जीवन जीना चाहिए।
Maha Shivratri पर शिवजी की पूजा का विशेष महत्व
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित किया जाता है। भक्त व्रत रखते हैं और पूरी रात जागकर भगवान शिव का स्मरण करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान शिव अपने भक्तों की सभी परेशानियां दूर करते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में कथाओं के विवरण भिन्न हो सकते हैं। इसे आस्था और सामान्य जानकारी के रूप में ही पढ़ें।


