कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। अपने बेबाक अंदाज़ के लिए मशहूर ममता बनर्जी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि देश जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनमें केंद्र की भूमिका बेहद कमजोर और उदासीन दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि “प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी सरकार आम लोगों की समस्याओं से पूरी तरह दूर हो चुकी है और केवल चुनावी रणनीतियों में व्यस्त नजर आती है।”

ममता बनर्जी ने कहा कि देश में आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक तनाव जैसे बड़े मुद्दे लोगों को परेशान कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार की प्राथमिकता सिर्फ चुनाव और राजनीतिक लाभ के मुद्दे ही रह गए हैं। उन्होंने कहा कि यह समय राजनीतिक बयानबाज़ी का नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्रवाई का है।
केंद्र की भूमिका पर सवाल
ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि जब कभी राज्य किसी बड़ी समस्या का सामना करता है, तब केंद्र को तुरंत सक्रिय होकर कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि “संविधान ने केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करने की जिम्मेदारी दी है, लेकिन जब राज्यों को सहयोग की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब केंद्र हाथ पीछे खींच लेता है। यह केवल राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है, जिसे जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार को हर राज्य के साथ एक समान व्यवहार करना चाहिए। ममता ने दावा किया कि बीजेपी द्वारा शासित राज्यों को केंद्र से तुरंत सहायता मिलती है, जबकि विपक्षी दलों के राज्यों को नजरअंदाज किया जाता है। उनकी यह टिप्पणी राजनीतिक हलकों में तेजी से चर्चा का विषय बन गई है।
“जनता परेशान, सरकार बेपरवाह” – ममता बनर्जी
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेरोजगारी और महंगाई की वजह से आम लोग पहले से ही भारी दबाव में हैं। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि वह देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को लेकर तुरंत आपात कदम उठाए।
ममता ने कहा, “देश में युवाओं की हालत बेहद खराब है। रोजगार के अवसर लगातार घट रहे हैं। किसान कर्ज़ और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे हैं। गरीब और मध्यम वर्ग महंगाई की मार से परेशान है। ऐसे समय में सरकार को जनता के साथ खड़े होने की जरूरत है, न कि चुनावी राजनीति में व्यस्त रहने की।”
उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि वह देश की वास्तविक समस्याओं पर फोकस करे और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करे।
“केंद्र तुरंत हस्तक्षेप करे” – ममता की मांग
उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब केंद्र को जिम्मेदारी समझते हुए तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए और हालात को सामान्य करने के लिए कदम उठाने चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है, जब कई राज्यों में राजनीतिक तनाव, आर्थिक चुनौतियाँ और प्रशासनिक विवाद बढ़ते जा रहे हैं।
ममता ने केंद्र से कहा कि वह विपक्षी राज्यों को प्रताड़ित करने की नीति बंद करे और संघीय ढांचे को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि देश की एकता और लोकतंत्र को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र और राज्यों का सहयोग बेहद जरूरी है।
राजनीतिक वाद-विवाद तेज
ममता बनर्जी के इस बयान ने भारतीय राजनीति में नई हलचल मचा दी है। बीजेपी नेताओं ने उन पर पलटवार करते हुए कहा कि ममता बनर्जी हमेशा केंद्र की नीतियों का विरोध करके मुद्दों को भटकाने की कोशिश करती हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार लगातार राज्यों के विकास के लिए प्रयासरत है।
हालाँकि, तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि विपक्षी राज्यों के साथ भेदभाव साफ दिखाई देता है। टीएमसी नेताओं के अनुसार, ममता बनर्जी का बयान देश की जनता की आवाज है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह बयान सिर्फ राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि एक व्यापक संदेश है कि केंद्र और राज्यों के बीच बढ़ती दूरी देश के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
चुनावों से पहले ऐसा बयान राजनीतिक रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ममता बनर्जी आने वाले लोकसभा चुनावों में एक बड़े विपक्षी चेहरे के रूप में उभरना चाहती हैं, और प्रधानमंत्री मोदी पर बढ़ते हमले इसी राजनीतिक तैयारी का हिस्सा हैं।
आगे की राजनीति क्या संकेत दे रही है?
ममता का यह बयान आने वाले राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकता है। केंद्र और बीजेपी की प्रतिक्रिया पर अब सबकी नजरें टिकी होंगी। विपक्षी दलों का दावा है कि देश के मुद्दों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए, जबकि सत्ताधारी दल का कहना है कि विकास कार्यों को नकारना राजनीति का एक हिस्सा बन गया है।
कुल मिलाकर, ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जो हमला बोला है, उसने राष्ट्रीय राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की हलचलें और बयानबाज़ी देश भर में सुर्खियाँ बन सकती हैं।

