हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में स्थित पार्वती वैली की गोद में बसा मणिकरण साहिब गुरुद्वारा अपनी आध्यात्मिक आस्था के साथ-साथ एक अनोखे प्राकृतिक रहस्य के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। बर्फ से ढके पहाड़, ठिठुराती ठंड और शून्य से नीचे जाता तापमान—इन सबके बीच यहां से निकलने वाला खौलता हुआ पानी आज भी लोगों को हैरान करता है। यही वजह है कि देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु और पर्यटक इस चमत्कार को देखने मणिकरण पहुंचते हैं।

मणिकरण साहिब गुरुद्वारा पार्वती नदी के तट पर स्थित है। सर्दियों में जब आसपास का इलाका बर्फ की चादर ओढ़ लेता है, तब भी यहां के गरम पानी के झरने लगातार उबलते रहते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इसी पानी में गुरुद्वारे का लंगर तैयार किया जाता है। कच्चे चावल, दाल और सब्जियां कुछ ही समय में पक जाती हैं, जो इसे दुनिया के सबसे अनोखे गुरुद्वारों में शामिल करता है।
आस्था और इतिहास से जुड़ी कहानी
सिख धर्म की मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान प्रथम सिख गुरु गुरु नानक देव जी से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि गुरु नानक देव जी अपने शिष्य भाई मर्दाना के साथ यहां आए थे। जब लंगर पकाने के लिए आग नहीं मिली, तब गुरु जी ने अपनी दिव्य शक्ति से धरती से गर्म पानी का झरना प्रकट किया। तभी से यहां यह गर्म पानी लगातार बह रहा है। श्रद्धालु इसे गुरु कृपा का प्रतीक मानते हैं।
वैज्ञानिक नजरिया क्या कहता है
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ विज्ञान भी इस रहस्य को समझाने की कोशिश करता है। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, मणिकरण क्षेत्र टेक्टोनिक प्लेट्स के सक्रिय क्षेत्र में आता है। धरती के भीतर मौजूद ज्वालामुखीय ऊर्जा और गैसों के कारण यहां भू-तापीय स्रोत बनते हैं, जिनसे अत्यधिक गर्म पानी बाहर निकलता है। यही वजह है कि बर्फीले मौसम में भी इन कुंडों का पानी उबलता रहता है।
पर्यटन और श्रद्धा का अनोखा संगम
मणिकरण साहिब न केवल सिख श्रद्धालुओं के लिए पवित्र तीर्थ है, बल्कि हिंदू धर्म में भी इसका विशेष महत्व है। पास ही स्थित रामकुंड और शिव मंदिर इसे और भी खास बनाते हैं। यही कारण है कि यह स्थान आध्यात्मिकता, प्रकृति और रहस्य का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है। सर्दियों में यहां की सुंदरता और बढ़ जाती है, जब चारों ओर बर्फ और बीच में उबलते कुंड—एक अविस्मरणीय दृश्य बनाते हैं।
विदेशी सैलानियों के लिए भी आकर्षण
विदेशी पर्यटक मणिकरण को एक प्राकृतिक चमत्कार के रूप में देखते हैं। ठंडे पहाड़ों के बीच गरम पानी के झरने, नदी का कल-कल बहाव और गुरुद्वारे का शांत वातावरण उन्हें बार-बार यहां खींच लाता है। यही वजह है कि मणिकरण साहिब हिमाचल के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, ऐतिहासिक कथाओं और सामान्य वैज्ञानिक जानकारियों पर आधारित है। अलग-अलग स्रोतों और विश्वासों के अनुसार विवरण में भिन्नता संभव है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पाठक स्वयं जानकारी की पुष्टि करें।

