By: Vikash Kumar (Vicky)
होली का त्योहार जहां देशभर में रंग, अबीर और गुलाल के साथ उल्लास से मनाया जाता है, वहीं उत्तर प्रदेश की प्राचीन नगरी Varanasi में एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जो दुनिया भर में कौतूहल का विषय है। यहां रंगों की जगह चिता की भस्म से होली खेली जाती है। इस अनोखे आयोजन को ‘मसान होली’ या ‘भस्म होली’ के नाम से जाना जाता है। हर साल देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस अद्भुत दृश्य को देखने पहुंचते हैं।

मणिकर्णिका घाट पर अद्भुत दृश्य
काशी के प्रसिद्ध Manikarnika Ghat पर यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि धुलंडी से कुछ दिन पहले यहां श्मशान में साधु-संत और अघोरी चिता की भस्म से होली खेलते हैं। वर्ष 2026 में जहां 4 मार्च को देशभर में रंगों की होली खेली जाएगी, वहीं काशी में इससे पहले मसान होली का आयोजन होगा। श्मशान घाट पर ‘हर हर महादेव’ के जयकारों के बीच भस्म उड़ती है और वातावरण शिवमय हो उठता है।

क्यों खेली जाती है चिता की राख से होली
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस परंपरा की शुरुआत स्वयं Lord Shiva ने की थी। मान्यता है कि विवाह के बाद जब भगवान शिव पहली बार काशी आए, तब देवताओं और भक्तों ने हर्षोल्लास से होली मनाई। लेकिन शिव के गण, जिनमें भूत-प्रेत, पिशाच और अघोरी शामिल थे, इस उत्सव से वंचित रह गए। तब भोलेनाथ ने फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को श्मशान में अपने गणों के साथ चिता की भस्म से होली खेली। तभी से काशी में मसान होली की परंपरा शुरू हुई।
शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी श्मशान को वैराग्य और मोक्ष का प्रतीक बताया गया है। काशी को मोक्षदायिनी नगरी कहा जाता है, जहां मृत्यु को भी उत्सव के रूप में देखा जाता है। मसान होली जीवन और मृत्यु के दार्शनिक संतुलन का संदेश देती है। यह बताती है कि जीवन क्षणभंगुर है और अंततः सब कुछ पंचतत्व में विलीन हो जाता है।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
मसान होली सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव है। यहां रंगों की जगह भस्म का प्रयोग यह संदेश देता है कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि मुक्ति का मार्ग है। साधु-संतों के अनुसार यह होली अहंकार के त्याग और जीवन की नश्वरता को स्वीकार करने का प्रतीक है।
काशी की यह परंपरा भारतीय संस्कृति की विविधता और आध्यात्मिक गहराई को दर्शाती है। जहां एक ओर लोग रंगों में सराबोर होते हैं, वहीं दूसरी ओर मसान होली जीवन के अंतिम सत्य की याद दिलाती है।

देश-विदेश से उमड़ती है भीड़
मसान होली को देखने के लिए भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी पर्यटक पहुंचते हैं। कैमरों में कैद होते दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते हैं और हर साल यह आयोजन चर्चा का विषय बन जाता है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाते हैं ताकि आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

परंपरा और आस्था का संगम
काशी में मसान होली आस्था, परंपरा और दर्शन का अनूठा संगम है। यह उत्सव दिखाता है कि भारतीय संस्कृति में जीवन और मृत्यु दोनों को समान भाव से स्वीकार किया जाता है। यही कारण है कि यह अनोखी होली आज भी सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रखे हुए है।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। आयोजन की तिथि और स्वरूप स्थानीय परंपरा एवं प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार परिवर्तित हो सकते हैं।

