By:Vikash, Mala Mandal
मथुरा: उत्तर प्रदेश के धार्मिक शहर मथुरा में यमुना नदी में हुए दर्दनाक नाव हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य लगातार तेज किया जा रहा है। शुक्रवार को पैंटून पुल से टकराकर पलटी मोटरबोट में सवार श्रद्धालुओं में से सात लोग अब भी लापता हैं। प्रशासन ने शनिवार को सर्च ऑपरेशन को और व्यापक बनाते हुए 20 मोटरबोट और दर्जनों गोताखोरों को नदी में उतार दिया है।

हादसा कैसे हुआ?
यह हादसा उस समय हुआ जब श्रद्धालुओं से भरी एक मोटरबोट यमुना नदी में सफर कर रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाव का संतुलन अचानक बिगड़ गया और वह पैंटून पुल से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि नाव तुरंत पलट गई और उसमें सवार लोग नदी में गिर गए। बताया जा रहा है कि नाव में 37 से अधिक लोग सवार थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।

बचाव कार्य जारी, सात अब भी लापता
घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई थी। अब तक कई श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि कुछ को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, सात लोगों का अब भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
शनिवार सुबह से सर्च ऑपरेशन को और तेज करते हुए 20 मोटरबोट और प्रशिक्षित गोताखोरों को यमुना में उतारा गया। नदी के गहरे हिस्सों में विशेष उपकरणों की मदद से तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा।

प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
हादसे के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक जांच में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, नाव पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे, जिससे संतुलन बिगड़ने की संभावना बढ़ गई।
उत्तर प्रदेश सरकार ने भी घटना का संज्ञान लिया है और पीड़ितों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की भी घोषणा की जा सकती है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद यमुना नदी में नाव संचालन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटों पर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता और ओवरलोडिंग आम बात है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नदी में नाव संचालन के लिए सख्त नियम होने चाहिए, जिनका पालन सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। लाइफ जैकेट, निर्धारित क्षमता और नियमित जांच जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य होनी चाहिए।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया मंजर
घटना के समय मौजूद लोगों ने बताया कि अचानक नाव हिलने लगी और देखते ही देखते पलट गई। कई लोग तैरकर बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, जबकि कुछ तेज धारा में बह गए।
स्थानीय लोगों और मछुआरों ने भी बचाव कार्य में प्रशासन की मदद की और कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

आगे की कार्रवाई
प्रशासन अब हादसे के कारणों की विस्तृत जांच कर रहा है। यदि लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की जा सकती हैं।

मथुरा का यह नाव हादसा एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोलता है। सात श्रद्धालुओं का अब भी लापता होना चिंता का विषय है। प्रशासन और बचाव दल पूरी कोशिश में जुटे हैं कि जल्द से जल्द सभी को खोज निकाला जाए।

