By: Vikash Kumar ( Vicky )
माघ माह की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। इस दिन मौन व्रत, गंगा स्नान, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या की तिथि को लेकर लोगों के मन में असमंजस है कि यह 18 जनवरी को मनाई जाएगी या 19 जनवरी को। ऐसे में पंचांग के अनुसार तिथि, स्नान-दान का शुभ समय, बनने वाले योग और पूजन विधि को जानना जरूरी हो जाता है।

मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है। इस दिन मौन धारण करने से आत्मबल बढ़ता है और साधना में सफलता मिलती है। माघ माह में यह अमावस्या विशेष फलदायी मानी जाती है, इसलिए प्रयागराज, हरिद्वार और अन्य तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है।
18 या 19 जनवरी कब है मौनी अमावस्या 2026
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि का आरंभ और समाप्ति समय महत्वपूर्ण होता है। वर्ष 2026 में माघ अमावस्या तिथि 18 जनवरी की रात से शुरू होकर 19 जनवरी को समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर अधिकतर स्थानों पर मौनी अमावस्या 19 जनवरी 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। हालांकि कुछ जगहों पर स्थानीय पंचांग के अनुसार 18 जनवरी को भी इसका प्रभाव माना जा सकता है। इसलिए धार्मिक कार्यों से पहले स्थानीय पंचांग देखना शुभ रहता है।
दान-स्नान का शुभ मुहूर्त
मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान कर दान करना विशेष फल देता है। तिल, गुड़, कंबल, अन्न, वस्त्र और धन का दान करना शुभ माना गया है। स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देना और विष्णु मंत्रों का जाप करना भी लाभकारी बताया गया है।

मौनी अमावस्या पर बनने वाले शुभ योग
इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति के कारण शुभ योग बन रहे हैं, जिससे दान-पुण्य का कई गुना फल मिलने की मान्यता है। माघ अमावस्या और सोमवारी संयोग इसे और भी खास बना रहा है। यह योग आध्यात्मिक उन्नति और मनोकामना पूर्ति के लिए अनुकूल माना जा रहा है।
मौनी अमावस्या की पूजन विधि
मौनी अमावस्या के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। दीपक जलाकर विष्णु सहस्रनाम या महामंत्र का जाप करें। इस दिन यथासंभव मौन व्रत रखें और जरूरतमंद लोगों को दान दें। शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।
मौनी अमावस्या पर क्या करें और क्या न करें
इस दिन क्रोध, कटु वचन और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। मन को शांत रखें और सकारात्मक विचारों के साथ दिन बिताएं। दान और सेवा कार्यों में भाग लेना विशेष फलदायी माना गया है।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और सामान्य पंचांग गणनाओं पर आधारित है। तिथि और मुहूर्त स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले अपने स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

