
मध्यप्रदेश में 9 मासूम बच्चों की संदिग्ध मौतों के बाद राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने Coldref सिरप की बिक्री और वितरण पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। यह निर्णय स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जांच रिपोर्ट आने के बाद लिया गया है, जिसमें सिरप के सेवन और बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बीच संबंध की पुष्टि हुई है। सरकार ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई का रुख अपनाते हुए सिरप बनाने वाली कंपनी के अन्य उत्पादों की भी जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला
मध्यप्रदेश के शिवपुरी, छतरपुर और विदिशा जिलों में बीते हफ्ते Coldref नामक खांसी-जुकाम की सिरप पीने के बाद 9 बच्चों की मौत की खबर ने पूरे प्रदेश को हिला दिया। अभिभावकों ने बताया कि बच्चों को सामान्य खांसी और बुखार था, जिसके बाद स्थानीय मेडिकल स्टोर से खरीदी गई Coldref सिरप दी गई। कुछ ही घंटों में बच्चों की हालत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन ज्यादातर की जान नहीं बच सकी।
इस दर्दनाक घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और सिरप के सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे गए। जांच में सिरप में हानिकारक रसायन पाए जाने की संभावना जताई गई है, जो बच्चों के लिए घातक साबित हुआ।
सरकार ने लिया सख्त एक्शन
घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल समीक्षा बैठक बुलाई और स्वास्थ्य मंत्री सहित संबंधित अधिकारियों को तलब किया। बैठक में यह फैसला लिया गया कि जब तक जांच रिपोर्ट पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, Coldref Syrup की बिक्री, वितरण और स्टॉकिंग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
राज्य औषधि नियंत्रण विभाग ने सभी जिलों को निर्देश जारी करते हुए मेडिकल स्टोर्स से Coldref सिरप को तुरंत हटाने के आदेश दिए हैं। टीमों को जिले-जिले भेजा गया है ताकि किसी भी स्टोर पर यह सिरप न बेची जाए।

कंपनी पर भी कार्रवाई शुरू
सरकार ने सिर्फ Coldref सिरप पर ही नहीं, बल्कि सिरप बनाने वाली कंपनी के अन्य उत्पादों पर भी नजर रखनी शुरू कर दी है। औषधि विभाग ने बताया कि कंपनी के अन्य उत्पादों के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं। यदि उनमें भी गुणवत्ता में खामी या रासायनिक असंतुलन पाया गया तो उनकी बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा।
इसके अलावा, कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उत्पादन इकाई की लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति या संस्था पर सख्त कार्रवाई होगी।
जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित
राज्य सरकार ने इस मामले की गहराई से जांच के लिए 3 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की है। समिति में एम्स भोपाल के फार्माकोलॉजी विभाग, राज्य औषधि नियंत्रण और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। समिति को 7 दिनों में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) या इथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले पदार्थ मिले हो सकते हैं। ये रसायन बच्चों के किडनी और लीवर पर असर डालते हैं, जिससे मौत तक हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
स्वास्थ्य विभाग ने जनता को सतर्क करते हुए Coldref सिरप का उपयोग न करने की अपील की है। किसी भी घर में अगर यह दवा मौजूद है, तो उसे तुरंत नष्ट करने या निकटतम स्वास्थ्य केंद्र को सौंपने की सलाह दी गई है।
साथ ही, विभाग ने डॉक्टरों और केमिस्टों को भी निर्देश दिया है कि बिना जांचे किसी भी कंपनी की दवा बच्चों को न दी जाए और किसी भी संदिग्ध साइड इफेक्ट की जानकारी तुरंत स्वास्थ्य अधिकारियों को दी जाए।
WHO और केंद्र सरकार की निगरानी में मामला
मध्यप्रदेश की यह घटना केंद्र सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की निगरानी में भी आ गई है। केंद्र ने राज्यों से रिपोर्ट मांगी है कि कहीं यह सिरप अन्य राज्यों में भी बेचा गया हो। WHO ने इस सिरप से संबंधित सैंपल की जांच कराने और वैश्विक स्तर पर रिपोर्ट साझा करने की प्रक्रिया शुरू की है।
जनता में आक्रोश, सोशल मीडिया पर बहस
बच्चों की मौत के बाद से सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोग सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई अभिभावक समूहों ने भी फार्मा कंपनियों की निगरानी मजबूत करने और दवाओं की गुणवत्ता जांच को अनिवार्य करने की मांग की है।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा Coldref सिरप पर लगाया गया प्रतिबंध यह दर्शाता है कि जनस्वास्थ्य से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मामला दवा उद्योग के लिए भी एक चेतावनी है कि लापरवाही या घटिया उत्पादन की कीमत निर्दोष जिंदगियों को नहीं चुकानी चाहिए। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा और दोषियों के खिलाफ उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाएगी।

