By: Vikash Kumar (Vicky)
झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान बिहार के बेगूसराय जिले का एक जवान देश के लिए शहीद हो गया। शहीद जवान का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर जब उनके गांव पहुंचा तो पूरा इलाका गमगीन हो गया। सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब शहीद की 11 साल की बेटी अपने पिता के पार्थिव शरीर को निहारती रही और आसपास मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

बताया जा रहा है कि बेगूसराय जिले के चेरिया बरियारपुर थाना क्षेत्र के श्रीपुर पंचायत निवासी जवान मुरारी कुमार झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान शहीद हो गए। शहादत की खबर मिलते ही गांव और आसपास के इलाके में शोक की लहर फैल गई।
नक्सल विरोधी अभियान में घायल हुए थे जवान
सूत्रों के मुताबिक मुरारी कुमार झारखंड के गुमला क्षेत्र में तैनात थे और सुरक्षा बलों की टीम के साथ नक्सल विरोधी अभियान में शामिल थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें कई जवान घायल हो गए। मुरारी कुमार भी इस मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल हुए थे। उन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस तरह एक और जवान देश की सुरक्षा के लिए शहीद हो गया।

देर रात गांव पहुंचा पार्थिव शरीर
शनिवार देर रात सेना के वाहन से शहीद जवान का पार्थिव शरीर उनके गांव लाया गया। जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पूरे इलाके में सन्नाटा छा गया। गांव के लोग बड़ी संख्या में अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। कई युवाओं ने बाइक रैली निकालकर शहीद को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान “भारत माता की जय” और “शहीद मुरारी अमर रहें” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
11 साल की बेटी को देखकर भावुक हुआ गांव
इस पूरे दृश्य का सबसे भावुक पल तब आया जब शहीद जवान की 11 साल की बेटी अपने पिता के पार्थिव शरीर को देखती रही। वह तिरंगे में लिपटे पिता के शव को निहारती रही और आसपास खड़े लोगों की आंखों से आंसू निकल पड़े। परिवार के लोग इस दर्दनाक दृश्य को देखकर खुद को संभाल नहीं पाए। शहीद की पत्नी और अन्य परिजन पार्थिव शरीर देखते ही रोने लगे। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि मुरारी कुमार बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखते थे और देश सेवा को अपना सबसे बड़ा लक्ष्य मानते थे। उनकी शहादत ने पूरे गांव को गर्व के साथ-साथ गहरे दुख में डुबो दिया है।

गांव में उमड़ी हजारों लोगों की भीड़
शहीद जवान के अंतिम दर्शन के लिए गांव और आसपास के क्षेत्रों से हजारों लोग पहुंचे। लोगों ने फूलों की बारिश कर और तिरंगा लेकर शहीद को श्रद्धांजलि दी। गांव के युवाओं ने कहा कि मुरारी कुमार की शहादत उन्हें देश सेवा के लिए प्रेरित करेगी। कई युवाओं ने सेना और अर्धसैनिक बलों में भर्ती होने की इच्छा जताई।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मुरारी कुमार के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों के मुताबिक कुछ दिनों से उनका फोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा था। बाद में सूचना मिली कि वह घायल हो गए हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द ठीक होकर घर लौट आएंगे, लेकिन बाद में उनकी शहादत की खबर मिली। यह खबर सुनते ही परिवार में मातम छा गया।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रहा अभियान
झारखंड और आसपास के कई इलाकों में नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षा बल इन क्षेत्रों में नक्सल नेटवर्क को खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चला रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक हाल के दिनों में सुरक्षा बलों ने कई नक्सली ठिकानों को ध्वस्त किया है और कई नक्सलियों को गिरफ्तार भी किया है। इसी अभियान के दौरान हुई मुठभेड़ में जवान मुरारी कुमार शहीद हो गए।

पूरे इलाके ने दी श्रद्धांजलि
शहीद जवान के अंतिम संस्कार में स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधि और हजारों लोग शामिल हुए। सभी ने शहीद को सलामी दी और उनकी शहादत को देश के लिए सर्वोच्च बलिदान बताया। लोगों का कहना है कि देश की सुरक्षा के लिए जवानों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। मुरारी कुमार की शहादत हमेशा लोगों को देशभक्ति और कर्तव्य की याद दिलाती रहेगी।

अमर रहे शहीद
गांव के लोगों ने कहा कि मुरारी कुमार की शहादत पूरे इलाके के लिए गर्व की बात है। हालांकि परिवार ने अपना बेटा खो दिया है, लेकिन देश को एक सच्चा वीर सपूत मिला है।
आज पूरा गांव एक स्वर में यही कह रहा है —
“शहीद मुरारी अमर रहें” और “भारत माता की जय”।

