By – Vikash Kumar (Vicky)
नटराज मूर्ति का आध्यात्मिक महत्व
Natraj Murti केवल एक कलात्मक प्रतिमा नहीं है, बल्कि यह भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक सोच का गहरा प्रतीक मानी जाती है। भगवान शिव का नटराज रूप सृष्टि के सृजन, संरक्षण और संहार—तीनों प्रक्रियाओं को एक साथ दर्शाता है। इस रूप में शिव को नृत्य करते हुए दिखाया गया है, जो यह बताता है कि यह संसार निरंतर गति और परिवर्तन में है।
नटराज का तांडव नृत्य क्या दर्शाता है
नटराज का तांडव नृत्य केवल विनाश का संकेत नहीं है, बल्कि यह सृजन और चेतना के प्रवाह का भी प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शिव का यह नृत्य ब्रह्मांड की लय को नियंत्रित करता है। जीवन और मृत्यु, सुख और दुख—सब इसी नृत्य के संतुलन से जुड़े हुए हैं।
पैरों के नीचे दबा जीव कौन है
नटराज मूर्ति में भगवान शिव के एक पैर के नीचे एक बौने जैसे जीव को दबा हुआ दिखाया जाता है। इस जीव को अपस्मार पुरुष कहा जाता है। यह कोई राक्षस नहीं, बल्कि मानव के भीतर मौजूद अज्ञान, अहंकार और मोह का प्रतीक माना जाता है। शिव का इस पर पैर रखना यह दर्शाता है कि ज्ञान और विवेक के सामने अज्ञान टिक नहीं सकता।
अपस्मार पुरुष का प्रतीकात्मक अर्थ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपस्मार पुरुष अज्ञान और मानसिक अंधकार का प्रतिनिधित्व करता है। जब तक व्यक्ति अपने अहंकार और भ्रम पर नियंत्रण नहीं पाता, तब तक उसे आत्मज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। नटराज रूप यह संदेश देता है कि शिव ज्ञान के माध्यम से अज्ञान को दबाकर मानव को मुक्ति की ओर ले जाते हैं।
नटराज के चार हाथों का रहस्य
नटराज मूर्ति में भगवान शिव के चार हाथ होते हैं, जिनका विशेष अर्थ बताया गया है। एक हाथ में डमरू है, जो सृष्टि की उत्पत्ति और नाद ब्रह्म का प्रतीक है। दूसरे हाथ में अग्नि है, जो संहार और परिवर्तन को दर्शाती है। तीसरा हाथ अभय मुद्रा में है, जो भयमुक्त जीवन का संदेश देता है, जबकि चौथा हाथ उठे हुए पैर की ओर संकेत करता है, जो मोक्ष का मार्ग बताता है।
अग्नि मंडल और ब्रह्मांड का संकेत
नटराज के चारों ओर बना अग्नि का घेरा ब्रह्मांड की अनंत ऊर्जा और समय के चक्र को दर्शाता है। यह अग्नि यह बताती है कि सृष्टि कभी स्थिर नहीं रहती। हर अंत के बाद नया आरंभ होता है और यही जीवन का शाश्वत नियम है।
शिव का शांत मुख क्या सिखाता है
इतने तीव्र नृत्य और ऊर्जा के बावजूद नटराज का मुख शांत और स्थिर दिखाई देता है। यह दर्शाता है कि जीवन में कितनी भी हलचल क्यों न हो, भीतर शांति बनाए रखना ही सच्चा योग और साधना है। यह संतुलन ही शिव तत्व का मूल संदेश है।
चिदंबरम और नटराज की विशेष पूजा
तमिलनाडु का चिदंबरम मंदिर नटराज रूप की सबसे प्रमुख उपासना स्थली मानी जाती है। यहां भगवान शिव को आकाश तत्व का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि नटराज रूप में शिव संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त चेतना का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आज के जीवन में नटराज रूप का संदेश
आधुनिक जीवन में भी नटराज मूर्ति केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। यह योग, ध्यान और आत्मचिंतन से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। नटराज हमें सिखाते हैं कि परिवर्तन को स्वीकार करना, अहंकार को त्यागना और ज्ञान की ओर बढ़ना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।
यह लेख धार्मिक ग्रंथों, पुराणों और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। Newsbag.in इसकी पूर्ण ऐतिहासिक या वैज्ञानिक पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक निष्कर्ष को अपनाने से पहले विद्वानों और संबंधित ग्रंथों की सलाह अवश्य लें।

