By:Vikash Kumar (Vicky)
देश में नक्सली और आतंकी घटनाओं में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है। अब ऐसे बच्चों की शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी उठाने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल चिल्ड्रेन फंड (एनसीएफ) के माध्यम से आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। इस संबंध में झारखंड पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को निर्देश जारी करते हुए पात्र बच्चों की सूची गृह विभाग को भेजने को कहा है।

यह पहल उन परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपने प्रियजनों को खो दिया। सरकार का उद्देश्य है कि बलिदानियों के बच्चों की पढ़ाई आर्थिक तंगी के कारण बाधित न हो और वे सम्मानजनक भविष्य की ओर बढ़ सकें।
क्या है नेशनल चिल्ड्रेन फंड (NCF)?
केंद्र सरकार द्वारा संचालित नेशनल चिल्ड्रेन फंड (National Children Fund) एक विशेष योजना है, जिसके तहत आतंकवाद, नक्सल हिंसा या अन्य आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों के बच्चों को शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
इस योजना के अंतर्गत बच्चों की स्कूलिंग से लेकर उच्च शिक्षा तक की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहयोग दिया जाता है। कई मामलों में ट्यूशन फीस, किताबें, हॉस्टल शुल्क और अन्य शैक्षणिक खर्च भी शामिल किए जाते हैं।

झारखंड पुलिस को क्या निर्देश दिए गए?
झारखंड पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे बच्चों की पहचान करें, जिनके माता-पिता नक्सली या आतंकी हमलों में शहीद हुए हैं।
इसके लिए:
प्रत्येक जिले में डेटा संग्रह की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पात्र बच्चों का नाम, आयु, शैक्षणिक स्थिति और घटना का विवरण संकलित किया जाएगा।
पूरी रिपोर्ट गृह विभाग को भेजी जाएगी।
गृह विभाग द्वारा सत्यापन के बाद नामों को केंद्र सरकार को अग्रसारित किया जाएगा, ताकि उन्हें योजना का लाभ मिल सके।

किन बच्चों को मिलेगा लाभ?
इस योजना का लाभ उन बच्चों को मिलेगा:
जिनके माता-पिता नक्सली हमले में शहीद हुए हों।
जिनके अभिभावक आतंकी घटनाओं के शिकार बने हों।
जिनके परिवार की आय सीमित हो और शिक्षा जारी रखने में आर्थिक संकट हो।
सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी बच्चे की पढ़ाई धन की कमी के कारण बीच में न छूटे।

झारखंड मे क्यों अहम है यह फैसला?
झारखंड लंबे समय से नक्सल प्रभावित राज्यों में शामिल रहा है। कई जिलों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ों में जवानों के साथ-साथ स्थानीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं।
ऐसे में यह योजना राज्य के लिए विशेष महत्व रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा के माध्यम से इन बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना सामाजिक स्थिरता और विकास के लिए भी जरूरी है।

शिक्षा के साथ मिलेगा मनोवैज्ञानिक सहयोग
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बच्चों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं बल्कि काउंसलिंग और मार्गदर्शन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकती है। हिंसक घटनाओं में माता-पिता को खोने का मानसिक आघात बच्चों के भविष्य पर असर डालता है। ऐसे में समग्र सहायता पैकेज पर भी विचार किया जा रहा है।

प्रशासन की भूमिका अहम
इस योजना को सफल बनाने में जिला प्रशासन और पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। समय पर सही आंकड़े और पात्र बच्चों की पहचान ही सुनिश्चित करेगी कि सहायता सही लाभार्थियों तक पहुंचे।
राज्य सरकार और केंद्र के बीच समन्वय से यह प्रक्रिया तेज की जाएगी।
सामाजिक संगठनों ने किया स्वागत
इस फैसले का सामाजिक संगठनों और शिक्षाविदों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह कदम न केवल पीड़ित परिवारों को राहत देगा बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी देगा।

भविष्य की दिशा
सरकार का यह प्रयास सुरक्षा बलों के मनोबल को भी मजबूत करेगा। जब जवान यह जानते हैं कि उनके परिवार की जिम्मेदारी सरकार उठाएगी, तो उनका विश्वास और समर्पण और अधिक बढ़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि संवेदनशील शासन का उदाहरण है।
नक्सली और आतंकी घटनाओं में अनाथ हुए बच्चों के लिए केंद्र सरकार की यह पहल एक मानवीय और सराहनीय कदम है। नेशनल चिल्ड्रेन फंड के माध्यम से मिलने वाली सहायता उनके सपनों को नई उड़ान दे सकती है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि जिला स्तर पर कितनी तेजी और पारदर्शिता से बच्चों की सूची तैयार कर केंद्र तक पहुंचाई जाती है।

