
नेपाल की सड़कों पर इस समय विरोध-प्रदर्शन का माहौल गरमा गया है। सरकार की नीतियों और फैसलों के खिलाफ युवाओं का गुस्सा चरम पर है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो गया है जिसने पूरे नेपाल समेत पड़ोसी देशों में भी चर्चा छेड़ दी है। इस वीडियो में एक घायल युवक अस्पताल से सीधे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचता दिखाई देता है। चेहरे पर गहरे जख्म और सीने पर गोलियों के निशान लिए यह युवक सरकार के खिलाफ नारेबाजी करता है।
यह दृश्य न केवल नेपाल के भीतर जनाक्रोश का प्रतीक बन गया बल्कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल खड़े करता है।
में साफ देखा जा सकता है कि युवक को अस्पताल से व्हीलचेयर या स्ट्रेचर पर नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होकर प्रदर्शन में भाग लेते दिखाया गया। उसके चेहरे पर ताजे घाव के निशान हैं और कपड़ों से खून के धब्बे झलक रहे हैं। सीने पर गोलियों के निशान भी दिखाई देते हैं, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि हाल ही में पुलिस की गोलीबारी में यह चोटें लगी हैं।
युवक, अपनी स्थिति की परवाह किए बिना, भीड़ के बीच नारे लगाता है और हाथ में तिरंगा थामे सरकार के खिलाफ विरोध जताता है।
प्रदर्शन का पृष्ठभूमि
नेपाल में बीते कुछ महीनों से राजनीतिक अस्थिरता और विवादित नीतियों को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। खासकर बेरोजगारी, महंगाई और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल उठाने वाले छात्रों और युवाओं को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। कई बार ये प्रदर्शन हिंसक रूप भी ले चुके हैं, जिसके चलते पुलिस और प्रदर्शनकारियों में भिड़ंत हुई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दर्जनों युवा घायल हुए हैं, जबकि विपक्षी दल दावा कर रहे हैं कि कई निर्दोष नागरिकों को गोली मारी गई है।

सोशल मीडिया पर बवाल
जैसे ही युवक का वीडियो सामने आया, ट्विटर (अब X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इसे तेजी से शेयर किया जाने लगा। #NepalProtest, #NepalYouth, और #JusticeForNepal जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। हजारों यूजर्स ने इस वीडियो पर प्रतिक्रिया दी और इसे ‘साहस की मिसाल’ बताया।
नेपाल ही नहीं, भारत और अन्य पड़ोसी देशों के सोशल मीडिया यूजर्स ने भी इस घटना पर चिंता जताई। कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने नेपाल सरकार से कार्रवाई की पारदर्शी जांच की मांग की है।
विपक्ष का हमला
नेपाल की मुख्य विपक्षी पार्टियों ने इस वीडियो को मुद्दा बनाते हुए सरकार पर सीधा हमला बोला है। विपक्ष का कहना है कि सरकार युवाओं की आवाज दबाने के लिए दमनकारी नीतियों का सहारा ले रही है। गोली चलाना और घायल युवाओं को अस्पताल से प्रदर्शन में जाने पर मजबूर करना सरकार की नाकामी को उजागर करता है।
पूर्व प्रधानमंत्री समेत कई बड़े नेताओं ने ट्वीट कर इस घटना की निंदा की और घायल युवक को लोकतंत्र का सच्चा सैनिक बताया।
सरकार का पक्ष
सरकार की ओर से अभी तक इस वीडियो की पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है। हालांकि, सरकारी प्रवक्ता का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो भ्रामक भी हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पुलिस की गोली से कोई घायल हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच की जाएगी।
लेकिन विरोध कर रही भीड़ और विपक्ष का मानना है कि सरकार केवल समय टालने की रणनीति अपना रही है।
मानवाधिकार आयोग की चिंता
नेपाल मानवाधिकार आयोग ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और कहा है कि यदि युवक पर पुलिस ने वास्तव में गोली चलाई है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है। आयोग ने सरकार को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
पड़ोसी देशों की नजर
भारत सहित कई पड़ोसी देशों के मीडिया चैनलों ने इस वीडियो को प्रमुखता से दिखाया। भारतीय सोशल मीडिया पर भी इस पर बहस छिड़ गई कि आखिर नेपाल में युवाओं को अपनी बात कहने पर इतनी कठोर सजा क्यों मिल रही है।
अस्पताल से उठकर प्रदर्शन में पहुंचा यह युवक अब नेपाल के लोकतांत्रिक आंदोलन का चेहरा बन गया है। चेहरे पर जख्म और सीने पर गोलियों के निशान लिए उसकी तस्वीर और वीडियो देश ही नहीं, विदेशों तक संदेश दे रही है कि जनता अपनी आवाज बुलंद करने से पीछे नहीं हटेगी।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस घटना पर क्या कदम उठाती है और क्या विपक्ष इस मुद्दे को बड़े आंदोलन में बदल पाता है।


