कूचबिहार (बंगाल), 9 दिसंबर 2025: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कूचबिहार में आयोजित ‘एंटी-SIR’ (एंटी-एनआरसी, एंटी-सीएए, और एंटी-एनपीआर) रैली के दौरान केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर कड़ी आलोचना की। रैली में ममता बनर्जी ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर बंगाल में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू नहीं होने देंगी और यहां कोई डिटेंशन सेंटर नहीं बनने देंगे। उन्होंने यह भी साफ तौर पर कहा कि पश्चिम बंगाल अपनी संस्कृति और पहचान की रक्षा करेगा, और बीजेपी और केंद्र सरकार की किसी भी नापाक योजना को नाकाम कर दिया जाएगा।

ममता का सख्त बयान: NRC और डिटेंशन सेंटर पर कड़ा रुख
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा, “आप चाहे जो कर लें, बंगाल में NRC लागू नहीं होगा। हम बंगाल की रक्षा करेंगे।” ममता ने दावा किया कि केंद्र सरकार और बीजेपी की योजनाओं के तहत NRC को देश भर में लागू किया जाना चाहता है, जो बंगाल में असहमति और विरोध का सामना करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बंगाल में NRC लागू किया गया, तो इससे लाखों गरीब और आदिवासी लोगों को नुकसान होगा, जिनका नाम रजिस्टर में नहीं होगा और वे डिटेंशन सेंटर में भेजे जाएंगे।
ममता ने यह भी कहा, “हम बंगाल की माताओं, बहनों और बेटियों को कभी भी असुरक्षित नहीं होने देंगे। बंगाल की जमीन पर कोई डिटेंशन सेंटर नहीं बनेगा। हम इसे कभी भी लागू नहीं होने देंगे। यह एक ऐतिहासिक धोखा है।”
केंद्र सरकार पर आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार और बीजेपी बंगाल के विकास में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने देश में धार्मिक और सांस्कृतिक ध्रुवीकरण का माहौल बना दिया है। “बीजेपी केवल एक ही काम कर रही है – लोगों को विभाजित करना और धर्म के नाम पर राजनीति करना,” ममता ने कहा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बंगाल की लोककल्याणकारी योजनाओं में भी दखल दे रही है और राज्य सरकार को अपनी योजनाओं को लागू करने में मुश्किलें पैदा कर रही है। ममता ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि आखिर क्यों बीजेपी के नेताओं को बंगाल की संस्कृति और पहचान पर हमला करने का अधिकार दिया गया है।
बंगाल की संस्कृति की रक्षा का संकल्प
रैली के दौरान ममता बनर्जी ने राज्य की संस्कृति, भाषा और पहचान की रक्षा करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि बंगाल को अपनी पहचान बचाए रखने के लिए किसी भी कीमत पर संघर्ष करने की आवश्यकता होगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “बंगाल एक स्वतंत्र राज्य है, और हम किसी भी बाहरी ताकत को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर हमला करने की अनुमति नहीं देंगे।”
ममता ने बंगाल में नागरिकता से जुड़े किसी भी कानून को लागू करने से साफ इनकार किया और यह भी दोहराया कि राज्य में किसी प्रकार का धार्मिक भेदभाव नहीं सहा जाएगा। उन्होंने कहा, “हमने हमेशा कहा है कि बंगाल एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है, जहां सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है। हम इसे बनाए रखेंगे।”
ममता ने उठाया जनजागरूकता अभियान का मुद्दा
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस अवसर पर ‘एंटी-SIR’ जनजागरूकता अभियान की शुरुआत भी की। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को NRC, CAA, और NPR के खतरों के बारे में जागरूक करना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इन मुद्दों पर ध्यान दें और सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाएं।
केंद्रीय योजनाओं पर भी सवाल उठाए
ममता ने केंद्र सरकार की कई योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को उनके अधिकारों से वंचित किया है। “केंद्र सरकार राज्य सरकारों की योजनाओं को कमजोर कर रही है। बंगाल में विकास कार्यों को रोकने के लिए भाजपा हर संभव कोशिश कर रही है,” ममता ने कहा।
ममता का विरोध और संकल्प
कूचबिहार में आयोजित ‘एंटी-SIR’ रैली ने राज्य की राजनीतिक गरिमा को फिर से ऊंचा किया है। ममता बनर्जी का यह कदम यह दर्शाता है कि वह केंद्र सरकार के खिलाफ खड़ी हैं और अपने राज्य की हक और सम्मान की रक्षा करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगी। उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे न केवल राज्य के भीतर बल्कि देशभर में गूंज रहे हैं।

