By: Vikash Kumar (Vicky)
3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण खगोलीय और धार्मिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य रहेगा। देशभर के लोग यह जानना चाहते हैं कि भारत में ग्रहण कब से कब तक दिखाई देगा, इसकी कुल अवधि कितनी होगी और सूतक काल कब से प्रभावी होगा। आइए विस्तार से जानते हैं समय और पूरी जानकारी।

भारत में कब से कब तक दिखेगा चंद्र ग्रहण
ज्योतिषीय और खगोलीय गणनाओं के अनुसार 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ होगा। ग्रहण का समापन शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा। हालांकि भारत में चंद्र ग्रहण का दृश्य चरण चंद्रोदय के समय से ही दिखाई देगा।
भारत में चंद्रोदय शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा। चूंकि ग्रहण की समाप्ति 6 बजकर 47 मिनट पर है, इसलिए भारत में यह चंद्र ग्रहण लगभग 25 मिनट तक ही दिखाई देगा। यानी सूर्यास्त के बाद चंद्रमा के उदित होते ही ग्रहण का अंतिम चरण देखने को मिलेगा।

राजधानी दिल्ली में चंद्रोदय का समय
भारत की राजधानी दिल्ली में चंद्रोदय शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा। इस समय से लेकर 6 बजकर 47 मिनट तक ग्रहण का दृश्य चरण और समापन देखा जा सकेगा। हालांकि देश के अन्य राज्यों और शहरों में चंद्रोदय का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, जिससे दृश्य अवधि में थोड़ा अंतर संभव है।
खग्रास चंद्र ग्रहण का समय
इस चंद्र ग्रहण का खग्रास चरण यानी पूर्ण चंद्र ग्रहण शाम 4 बजकर 34 मिनट से शुरू होगा। खग्रास का अर्थ है वह समय जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है। यह चरण भारत में चंद्रोदय से पहले घटित होगा, इसलिए देश में इसका पूर्ण दृश्य नहीं मिल पाएगा। भारत में मुख्य रूप से ग्रहण का अंतिम चरण ही दिखाई देगा।

सूतक काल कब से होगा मान्य
चंद्र ग्रहण के लिए सूतक काल ग्रहण प्रारंभ होने से लगभग 9 घंटे पहले माना जाता है। चूंकि ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू हो रहा है, इसलिए सूतक काल सुबह लगभग 6 बजकर 20 मिनट से प्रभावी हो सकता है। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद किए जाते हैं और शुभ कार्यों को टालने की परंपरा है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में मंत्र जाप, ध्यान और दान करना शुभ फलदायी माना जाता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इसे खुली आंखों से देखना सुरक्षित होता है।

3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में भले ही कम समय के लिए दिखाई देगा, लेकिन इसकी धार्मिक और खगोलीय महत्वता बनी रहेगी। इसलिए लोग इस दिन ग्रहण के समय और सूतक काल का विशेष ध्यान रखेंगे।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य खगोलीय गणनाओं और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न शहरों में चंद्रोदय और ग्रहण की अवधि में अंतर संभव है। किसी भी धार्मिक निर्णय से पहले स्थानीय पंचांग या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

