By: Vikash Kumar (Vicky)
पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में सामाजिक न्याय और शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की राशि को दोगुना करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस अहम फैसले के साथ ही कुल 31 प्रस्तावों पर कैबिनेट की मुहर लगी।

कैबिनेट के इस निर्णय से राज्य के लाखों गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला ड्रॉपआउट दर को कम करने और SC-ST छात्रों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा।
अब कक्षा 1 से 10 तक के छात्रों को मिलेगी दोगुनी छात्रवृत्ति
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कक्षा 1 से 10 तक के छात्र-छात्राओं को अब पहले से दोगुनी प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति दी जाएगी। पहले जहां छात्रों को ₹1200 से ₹1800 तक की वार्षिक सहायता मिलती थी, वहीं अब यह बढ़कर ₹1200 से ₹3600 वार्षिक कर दी गई है।
सरकार का मानना है कि महंगाई के इस दौर में बढ़ी हुई छात्रवृत्ति राशि से छात्रों की शैक्षणिक आवश्यकताओं जैसे किताबें, कॉपी, यूनिफॉर्म और अन्य खर्चों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

छात्रावास में रहने वाले छात्रों को ₹6000 वार्षिक सहायता
कैबिनेट ने छात्रावासों में रहने वाले SC-ST छात्रों के लिए भी बड़ी राहत दी है। अब ऐसे छात्रों को ₹6000 वार्षिक प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति दी जाएगी। इससे पहले यह राशि काफी कम थी, जिसके कारण कई छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते थे।
सरकार के इस फैसले से छात्रावासों में नामांकन बढ़ने की उम्मीद है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।

सामाजिक न्याय की दिशा में अहम कदम: सरकार
कैबिनेट के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने बताया कि यह निर्णय राज्य सरकार की सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की नीति का हिस्सा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार यह कहते रहे हैं कि शिक्षा ही समाज में बराबरी लाने का सबसे मजबूत माध्यम है।
सरकार का लक्ष्य है कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी SC-ST छात्र अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़े। इसी सोच के तहत प्री-मैट्रिक स्तर पर ही छात्रों को आर्थिक संबल देने का फैसला लिया गया है।

31 प्रस्तावों को मिली कैबिनेट की मंजूरी
इस बैठक में केवल छात्रवृत्ति ही नहीं, बल्कि कुल 31 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें विभिन्न विभागों से जुड़े प्रशासनिक, वित्तीय और विकास संबंधी प्रस्ताव शामिल हैं। हालांकि, छात्रवृत्ति वृद्धि का फैसला सबसे अहम और जनहित से जुड़ा माना जा रहा है।
राज्य सरकार के अनुसार, इन प्रस्तावों का सीधा असर शिक्षा, रोजगार, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर पड़ेगा।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया
कैबिनेट के इस फैसले के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताया है। वहीं, कुछ विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि छात्रवृत्ति की राशि को और बढ़ाया जाए और इसका समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का क्रियान्वयन सही तरीके से किया गया, तो आने वाले वर्षों में SC-ST छात्रों की शैक्षणिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

राज्य के लाखों छात्रों को होगा सीधा लाभ
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में SC और ST वर्ग के लाखों छात्र प्री-मैट्रिक स्तर पर पढ़ाई कर रहे हैं। इस फैसले से इन सभी छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। शिक्षा विभाग जल्द ही इस योजना से संबंधित दिशा-निर्देश जारी करेगा ताकि नई दरों पर छात्रवृत्ति का भुगतान जल्द शुरू किया जा सके।
सरकार को उम्मीद है कि यह फैसला न केवल शिक्षा को बढ़ावा देगा, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

