बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों ने अब जोर पकड़ लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 21 अक्टूबर से मुजफ्फरपुर में चुनाव प्रचार की औपचारिक शुरुआत करेंगे। जदयू और एनडीए गठबंधन के लिए यह रैली बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसी के साथ प्रदेश में एनडीए का चुनावी अभियान पूरे जोर-शोर से शुरू होगा। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहली जनसभा मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर क्षेत्र में आयोजित की जाएगी। इस दौरान एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मंच साझा करेंगे और आगामी चुनाव में एनडीए के विजन और विकास योजनाओं का खाका जनता के सामने रखेंगे।
नीतीश कुमार का विकास एजेंडा फिर केंद्र में
नीतीश कुमार का यह दौरा केवल एक राजनीतिक अभियान नहीं बल्कि उनके विकास मॉडल की पुनः प्रस्तुति माना जा रहा है। जदयू सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री इस रैली में शिक्षा, सड़क, बिजली, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन जैसे मुद्दों पर जनता से संवाद करेंगे।
उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में बिहार में हुए परिवर्तन को जनता के सामने रखा जाएगा और बताया जाएगा कि राज्य ने किस तरह पिछड़ेपन से निकलकर विकास की राह पकड़ी है।
एनडीए का लक्ष्य: 2025 में फिर सरकार
एनडीए नेताओं का कहना है कि इस चुनाव में गठबंधन का लक्ष्य “फिर एक बार, नीतीश सरकार” के नारे को मूर्त रूप देना है। जदयू, भाजपा, हम और वीआईपी सहित गठबंधन के अन्य घटक दल मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर चुके हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 21 अक्टूबर की रैली के बाद नीतीश कुमार का चुनावी दौरा राज्य के सभी जिलों में होगा। पहले चरण में उत्तर बिहार के 15 जिलों में जनसभाएं आयोजित की जाएंगी, जबकि दूसरे चरण में दक्षिण बिहार के इलाकों में प्रचार अभियान चलेगा।
विपक्ष पर निशाना साधने की भी होगी रणनीति
सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर रैली से ही विपक्ष पर तीखे हमले शुरू करेंगे। खासकर आरजेडी और कांग्रेस पर वे यह सवाल उठाएंगे कि उन्होंने बिहार के लिए अपने शासनकाल में क्या किया। जदयू नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार इस चुनाव में “काम बोलेगा” के नारे के साथ जनता के बीच जाएंगे।
मुजफ्फरपुर क्यों चुना गया पहला ठिकाना?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मुजफ्फरपुर को चुनावी अभियान की शुरुआत के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि यह उत्तर बिहार का राजनीतिक रूप से रणनीतिक जिला है। यह जिला मिथिला और तिरहुत क्षेत्र के मतदाताओं को प्रभावित करता है। साथ ही, यहां जदयू का पारंपरिक वोट बैंक भी मजबूत माना जाता है। पिछले चुनावों में मुजफ्फरपुर और इसके आस-पास के जिलों में एनडीए को अच्छी सफलता मिली थी। इसलिए माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री यहीं से प्रचार की शुरुआत कर पूरे बिहार में उत्साह का संदेश देना चाहते हैं।
एनडीए की रैली में होगा शक्ति प्रदर्शन
नीतीश कुमार की इस जनसभा को लेकर प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर हैं। जदयू और भाजपा दोनों ही दल अपने-अपने कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में रैली में जुटाने के लिए प्रयासरत हैं। बताया जा रहा है कि करीब 1 लाख से अधिक कार्यकर्ता और समर्थक इस सभा में शामिल होंगे। रैली स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए जा रहे हैं। मंच पर मुख्यमंत्री के अलावा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी और हम प्रमुख जीतन राम मांझी की मौजूदगी भी तय मानी जा रही है।
महिलाओं और युवाओं को साधने की तैयारी
चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार की पूरी रणनीति इस बार महिलाओं और युवाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई है। मुख्यमंत्री ने पिछले वर्षों में “आरक्षण बढ़ाने” और “सशक्त महिला – सक्षम बिहार” जैसे अभियानों से बड़ी जनसंपर्क उपलब्धियां हासिल की हैं। इसलिए संभावना है कि वे अपने पहले भाषण में महिलाओं की शिक्षा, सरकारी नौकरियों में आरक्षण और रोजगार के अवसरों को लेकर बड़े ऐलान कर सकते हैं। वहीं, युवाओं के लिए “बिहार स्टार्टअप मिशन” और “कौशल विकास योजना” जैसी योजनाओं का जिक्र भी प्रमुखता से होगा।
जनता के बीच पहुंचाने का होगा संदेश
जदयू के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि 21 अक्टूबर की रैली के बाद मुख्यमंत्री का कार्यक्रम लगातार जारी रहेगा। रोजाना 2 से 3 जिलों में सभाएं और रोड शो आयोजित किए जाएंगे।
नीतीश कुमार की रैलियों के वीडियो और भाषणों को सोशल मीडिया पर भी व्यापक रूप से प्रसारित किया जाएगा, ताकि युवा और शहरी मतदाता भी सीधे संवाद से जुड़ सकें।
विपक्ष की नजरें भी नीतीश की रैली पर
वहीं विपक्षी दल आरजेडी और कांग्रेस भी नीतीश कुमार की पहली रैली पर पैनी नजर रखे हुए हैं। आरजेडी नेताओं ने दावा किया है कि जनता इस बार “परिवर्तन” चाहती है, जबकि जदयू का मानना है कि “विकास और स्थिरता” की राह पर जनता का भरोसा अब भी नीतीश कुमार के साथ है। बहरहाल, यह स्पष्ट है कि 21 अक्टूबर से बिहार में चुनावी तापमान और बढ़ जाएगा। नीतीश कुमार की रैली केवल एनडीए के लिए नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए चुनावी माहौल की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है।

