By Vikash Kumar ( Vicky )
आज 24 दिसंबर 2025, दिन बुधवार को पौष मास की विनायक चतुर्थी का पावन व्रत रखा जा रहा है। विनायक चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करने और व्रत कथा सुनने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है।

बुधवार का दिन स्वयं भगवान गणेश का प्रिय दिन है और जब इस दिन विनायक चतुर्थी का संयोग बनता है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। आज पौष विनायक चतुर्थी की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:19 बजे से दोपहर 1:11 बजे तक बताया गया है। इस दौरान पूजा के साथ व्रत कथा सुनना अत्यंत आवश्यक माना गया है, क्योंकि कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
पौष विनायक चतुर्थी व्रत का महत्व
शास्त्रों के अनुसार विनायक चतुर्थी का व्रत करने से बुद्धि, विवेक, धन, संतान सुख और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। जो लोग बार-बार बाधाओं, आर्थिक परेशानियों या मानसिक तनाव से जूझ रहे होते हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है। पौष मास की विनायक चतुर्थी विशेष रूप से पापों के नाश और शुभ फलों की प्राप्ति के लिए की जाती है।
विनायक चतुर्थी व्रत कथा
प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक अत्यंत धर्मपरायण ब्राह्मण रहता था। वह नियमित रूप से भगवान गणेश की पूजा करता था, लेकिन उसके जीवन में अनेक कष्ट बने रहते थे। व्यापार में हानि, घर में कलह और मन में अशांति ने उसे घेर रखा था।
एक दिन उसे एक विद्वान ऋषि मिले। ब्राह्मण ने अपनी सारी समस्याएं उनके सामने रख दीं। ऋषि ने कहा कि यदि वह पौष मास की विनायक चतुर्थी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करे, तो भगवान गणेश उसकी सभी बाधाओं को दूर कर देंगे।
ऋषि की आज्ञा मानकर ब्राह्मण ने विनायक चतुर्थी के दिन व्रत रखा। प्रातः स्नान कर उसने घर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित की। दूर्वा, मोदक और लड्डू अर्पित कर विधिपूर्वक पूजा की और व्रत कथा सुनी। पूरे दिन उसने मन, वचन और कर्म से गणेश जी का स्मरण किया।
कथा सुनने और व्रत पूर्ण होने के बाद ब्राह्मण ने गणेश जी से सच्चे मन से अपनी मनोकामनाएं रखीं। कहते हैं उसी दिन से उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगे। व्यापार में लाभ होने लगा, घर में सुख-शांति लौट आई और सभी कार्य बिना किसी बाधा के पूरे होने लगे।
तभी से यह मान्यता प्रचलित हुई कि पौष विनायक चतुर्थी के दिन व्रत कथा सुनने और श्रद्धा से पूजा करने पर भगवान गणेश शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं।
व्रत कथा सुनने का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार केवल व्रत रखना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि व्रत कथा सुनने से उसकी पूर्णता होती है। कथा सुनने से व्रत की महिमा का ज्ञान होता है और व्यक्ति के मन में श्रद्धा और विश्वास मजबूत होता है। यही कारण है कि विनायक चतुर्थी की पूजा के समय कथा श्रवण को अनिवार्य बताया गया है।
पौष विनायक चतुर्थी पर क्या करें
आज के दिन गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें, मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और पूजा के समय विनायक चतुर्थी व्रत कथा अवश्य सुनें। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और आने वाला समय मंगलमय होता है।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रीय कथाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को करने से पहले अपनी परंपरा और आस्था के अनुसार निर्णय लें।
