By: Vikash Kumar (Vicky)
बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (PK) की पार्टी जन सुराज को उस वक्त करारा झटका लगा, जब पार्टी से जुड़े चर्चित नेता और मशहूर भोजपुरी गायक रितेश पांडेय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। रितेश पांडेय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस बात की जानकारी सार्वजनिक की।
रितेश पांडेय बिहार के कहलगांव विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे और जन सुराज के लिए उन्हें एक बड़ा चेहरा माना जा रहा था। उनके इस्तीफे ने न सिर्फ पार्टी को झटका दिया है, बल्कि बिहार की उभरती सियासत में कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

X पोस्ट के जरिए दिया इस्तीफा
रितेश पांडेय ने अपने X पोस्ट में लिखा कि वह व्यक्तिगत और वैचारिक कारणों से जन सुराज पार्टी से अलग हो रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपने पोस्ट में किसी भी नेता या पार्टी पर सीधा आरोप नहीं लगाया, लेकिन उनके अचानक फैसले ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
उन्होंने लिखा कि वह आगे भी जनता के हित में काम करते रहेंगे, लेकिन किस राजनीतिक मंच से यह स्पष्ट नहीं किया गया।
भोजपुरी स्टार से सियासी मैदान तक का सफर
रितेश पांडेय सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि भोजपुरी इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम हैं।
“हेलो कौन”, “लॉलीपॉप लागेलु” जैसे सुपरहिट गानों से पहचान बनाने वाले रितेश पांडेय की बिहार और पूर्वांचल में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है।
इसी लोकप्रियता को देखते हुए जन सुराज ने उन्हें पार्टी से जोड़ा था, ताकि युवा और ग्रामीण वोटर्स को साधा जा सके। कहलगांव जैसे क्षेत्र में उनका सामाजिक प्रभाव पार्टी के लिए अहम माना जा रहा था।
जन सुराज के लिए क्यों है यह बड़ा झटका?
प्रशांत किशोर पिछले कुछ समय से बिहार में वैकल्पिक राजनीति का दावा कर रहे हैं। जन सुराज यात्रा और संगठन निर्माण के जरिए वह खुद को पारंपरिक दलों से अलग दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
ऐसे में:
एक लोकप्रिय चेहरा का पार्टी छोड़ना
चुनाव से पहले संगठन को कमजोर करना
जनता के बीच पार्टी की स्थिरता पर सवाल
इन सभी वजहों से रितेश पांडेय का इस्तीफा जन सुराज के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

इस्तीफे के पीछे संभावित कारण
हालांकि आधिकारिक तौर पर कारण सामने नहीं आए हैं, लेकिन सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं—
टिकट को लेकर असहमति
संगठन के अंदर निर्णय प्रक्रिया से नाराजगी
स्थानीय नेतृत्व से तालमेल की कमी
या फिर किसी दूसरी पार्टी से संभावित बातचीत
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में रितेश पांडेय किसी बड़े दल का दामन थाम सकते हैं।
कहलगांव सीट पर पड़ेगा असर
कहलगांव विधानसभा सीट पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जाती है।
रितेश पांडेय के इस्तीफे से:
जन सुराज को नया उम्मीदवार ढूंढना होगा
स्थानीय स्तर पर पार्टी की पकड़ कमजोर हो सकती है
विरोधी दलों को सीधा फायदा मिल सकता है
यह सीट अब और ज्यादा दिलचस्प हो गई है।
PK की रणनीति पर उठे सवाल
प्रशांत किशोर अब तक चुनावी रणनीतिकार के रूप में सफल रहे हैं, लेकिन एक राजनीतिक पार्टी चलाना बिल्कुल अलग चुनौती है।
लगातार नेताओं के अलग होने से यह सवाल उठने लगे हैं कि—
क्या जन सुराज संगठनात्मक रूप से मजबूत है?
क्या पार्टी के भीतर संवाद की कमी है?
क्या नए नेताओं को पर्याप्त स्पेस मिल पा रहा है?
इन सवालों के जवाब आने वाले समय में ही साफ होंगे।
आगे क्या करेंगे रितेश पांडेय?
फिलहाल रितेश पांडेय ने अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई संकेत नहीं दिया है। लेकिन उनके समर्थकों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर टिकी है कि—
क्या वह किसी राष्ट्रीय पार्टी में शामिल होंगे?
या फिर किसी क्षेत्रीय दल के साथ नई पारी शुरू करेंगे?
जो भी हो, उनका अगला कदम बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। जन सुराज पार्टी के लिए रितेश पांडेय का इस्तीफा सिर्फ एक नेता का जाना नहीं, बल्कि संगठन और रणनीति दोनों के लिए चेतावनी माना जा रहा है। वहीं रितेश पांडेय के लिए यह फैसला उनके राजनीतिक भविष्य की नई दिशा तय कर सकता है।
बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में और भी बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं।

