By: Vikash Kumar (Vicky)
असम। पूर्वोत्तर भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण तब बना जब प्रधानमंत्री Narendra Modi का विमान सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग पर उतरा। असम के डिब्रुगढ़-मोरान हाईवे पर 4.2 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे देश की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की दिशा में बड़ा कदम बताया। इस मौके पर Indian Air Force के फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों ने आसमान में रोमांचक एरियल डिस्प्ले पेश किया।

क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF)?
इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी यानी ELF विशेष रूप से तैयार किया गया हाईवे का वह हिस्सा होता है, जिसे आपातकालीन स्थिति में वायुसेना के विमान उतारने और उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया जाता है। डिब्रुगढ़-मोरान हाईवे पर तैयार की गई 4.2 किमी लंबी यह सुविधा असम की पहली और पूर्वोत्तर भारत की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है। इस सुविधा को इस तरह से विकसित किया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर लड़ाकू विमान, भारी परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर यहां सुरक्षित रूप से लैंडिंग और टेकऑफ कर सकें।

पीएम मोदी का संबोधन
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह परियोजना ‘न्यू इंडिया’ की सोच को दर्शाती है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर केवल विकास के लिए नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करने के लिए तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत अब विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और केंद्र सरकार इस क्षेत्र को देश की विकास यात्रा का अहम इंजन बना रही है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सड़क, रेल, हवाई और जलमार्ग—चारों क्षेत्रों में पूर्वोत्तर राज्यों में अभूतपूर्व निवेश किया जा रहा है।

वायुसेना का भव्य एरियल शो
उद्घाटन के बाद भारतीय वायु सेना ने शानदार एयर शो का प्रदर्शन किया। फाइटर जेट्स ने हाईवे पर टच-एंड-गो लैंडिंग की, जबकि ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों ने समन्वित उड़ान भरकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। यह नजारा देखने के लिए स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसी सुविधाएं युद्धकाल या प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में बेहद कारगर साबित होती हैं। इससे सैन्य संसाधनों की त्वरित तैनाती संभव हो पाती है।

रणनीतिक दृष्टि से क्यों अहम है असम?
असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह इलाका सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। चीन और म्यांमार से सटे इस क्षेत्र में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से प्राथमिकता में रहा है।
डिब्रुगढ़-मोरान हाईवे पर बनी ELF से वायुसेना को अतिरिक्त रनवे विकल्प मिलेगा, जिससे आपात स्थिति में ऑपरेशन की क्षमता बढ़ेगी।

पहले भी बने हैं ऐसे रनवे
भारत में इससे पहले राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी हाईवे पर इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप तैयार की जा चुकी हैं, लेकिन असम में यह पहली ऐसी सुविधा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में देश के अन्य रणनीतिक इलाकों में भी इस तरह की परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना से केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से पर्यटन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। असम सरकार का कहना है कि यह परियोजना राज्य को लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने में मददगार होगी।

पूर्वोत्तर में इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर राज्यों में सड़कों, पुलों, हवाई अड्डों और रेलवे परियोजनाओं में तेज गति से काम हुआ है। केंद्र सरकार का दावा है कि इससे क्षेत्र में निवेश बढ़ा है और रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
डिब्रुगढ़-मोरान हाईवे पर बनी 4.2 किमी लंबी ELF इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो विकास और सुरक्षा दोनों को संतुलित करती है।

असम में पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी का उद्घाटन केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना का शुभारंभ नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की रणनीतिक मजबूती का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विमान का हाईवे पर उतरना इस बात का संदेश देता है कि देश अब सुरक्षा और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।

