By: Vikash Kumar (Vicky)
यरुशलम। भारत और इजरायल के संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यरुशलम में अपने संबोधन के दौरान ऐलान किया कि भारत और इजरायल के रिश्ते अब ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ (Special Strategic Partnership) के स्तर पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इजरायल के संबंध सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह साझेदारी साझा मूल्यों, नवाचार, सुरक्षा सहयोग और आर्थिक प्रगति पर आधारित है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने पिछले वर्षों में रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और स्टार्टअप सेक्टर में उल्लेखनीय प्रगति की है।

विशेष रणनीतिक साझेदारी का महत्व
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मजबूत सहयोग को दर्शाता है। भारत और इजरायल के बीच रक्षा क्षेत्र में पहले से ही व्यापक सहयोग है। आधुनिक तकनीक, ड्रोन, मिसाइल प्रणाली और निगरानी उपकरणों के क्षेत्र में इजरायल भारत का एक प्रमुख साझेदार रहा है। कृषि और जल प्रबंधन में भी इजरायल की तकनीक भारत के कई राज्यों में सफलतापूर्वक लागू की गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इजरायल की उन्नत सिंचाई प्रणाली और जल संरक्षण तकनीक भारतीय किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

जल्द होगा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और इजरायल के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समझौता दोनों देशों के व्यापार और निवेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। वर्तमान में भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। हीरा, रक्षा उपकरण, कृषि तकनीक, आईटी और फार्मास्यूटिकल्स प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र हैं। FTA लागू होने के बाद व्यापार में और तेजी आने की उम्मीद है। इससे दोनों देशों के उद्योगों और युवाओं को नए अवसर मिलेंगे।
नवाचार और स्टार्टअप में सहयोग
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इजरायल दोनों ही देश नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में अग्रणी हैं। इजरायल को ‘स्टार्टअप नेशन’ कहा जाता है, जबकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और संयुक्त अनुसंधान से वैश्विक स्तर पर नई संभावनाएं खुलेंगी।

सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख
प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख दोहराते हुए कहा कि भारत और इजरायल दोनों ही देश आतंकवाद से प्रभावित रहे हैं और इस चुनौती से मिलकर निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए आतंकवाद के खिलाफ एकजुट कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग और मजबूत होगा। यह साझेदारी क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।

ऐतिहासिक संबंधों की मजबूती
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में यहूदी समुदाय सदियों से शांति और सम्मान के साथ रह रहा है। यह दोनों देशों के बीच पारस्परिक सम्मान और विश्वास की मजबूत नींव को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घोषणा भारत की पश्चिम एशिया नीति में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत ने संतुलित कूटनीति अपनाते हुए इजरायल और अन्य पश्चिम एशियाई देशों के साथ समान रूप से मजबूत संबंध बनाए हैं।

आर्थिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण
विशेष रणनीतिक साझेदारी और प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारत के लिए आर्थिक और सामरिक दोनों दृष्टि से अहम है। इससे भारत को उन्नत तकनीक, रक्षा उपकरण और कृषि नवाचार में लाभ मिलेगा, जबकि इजरायल को भारत जैसे बड़े बाजार तक व्यापक पहुंच मिलेगी।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा और घोषणा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाली मानी जा रही है। आने वाले समय में यह साझेदारी वैश्विक मंच पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
यरुशलम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान भारत-इजरायल संबंधों के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा और जल्द होने वाला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच भरोसे, सहयोग और विकास की नई दिशा तय करेंगे। यह कदम न सिर्फ आर्थिक विकास को गति देगा बल्कि वैश्विक मंच पर दोनों देशों की भूमिका को भी सशक्त बनाएगा।

