By: Vikash Kumar( Vicky )
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से अपने नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में शिफ्ट होने जा रहे हैं। केंद्र सरकार की प्रशासनिक संरचना को और अधिक आधुनिक, सुव्यवस्थित और कार्यकुशल बनाने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अब ‘सेवा तीर्थ-1’ भवन में संचालित होगा, जो कार्यपालिका परिसर-1 में वायु भवन के समीप स्थित है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, ‘सेवा तीर्थ’ परिसर को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है, ताकि प्रधानमंत्री कार्यालय के कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। यह भवन न केवल प्रशासनिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करने में सहायक होगा, बल्कि सुरक्षा, तकनीक और समन्वय के लिहाज से भी पहले से कहीं अधिक उन्नत है।
क्यों खास है ‘सेवा तीर्थ’ परिसर
‘सेवा तीर्थ’ नाम अपने आप में सरकार की कार्यसंस्कृति और सेवा भावना को दर्शाता है। इस परिसर को इस सोच के साथ विकसित किया गया है कि शासन का हर निर्णय जनसेवा और राष्ट्रहित को प्राथमिकता दे। प्रधानमंत्री कार्यालय का यहां स्थानांतरण इस बात का संकेत है कि सरकार प्रशासनिक सुधारों और आधुनिक बुनियादी ढांचे पर लगातार काम कर रही है।
बताया जा रहा है कि ‘सेवा तीर्थ-1’ भवन में अत्याधुनिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, हाई-सिक्योरिटी सिस्टम, स्मार्ट मीटिंग रूम, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और ऊर्जा दक्ष सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे न केवल कामकाज की गति तेज होगी, बल्कि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वय भी आसान होगा।
सुरक्षा और तकनीक पर विशेष जोर
प्रधानमंत्री कार्यालय की सुरक्षा हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। इसमें उन्नत निगरानी प्रणाली, आधुनिक एक्सेस कंट्रोल और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, नया परिसर मौजूदा और भविष्य की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
तकनीकी दृष्टि से भी यह भवन अत्याधुनिक है। डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए यहां हाई-स्पीड नेटवर्क, सुरक्षित डेटा सेंटर और आधुनिक संचार सुविधाएं स्थापित की गई हैं। इससे प्रधानमंत्री कार्यालय के कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ेंगी।
प्रशासनिक कार्यों में आएगी तेजी
प्रधानमंत्री कार्यालय देश के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्रों में से एक है। यहां से राष्ट्रीय नीतियों, योजनाओं और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े अहम फैसले लिए जाते हैं। नए कार्यालय में शिफ्ट होने से निर्णय प्रक्रिया और अधिक सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में काम करने से विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बेहतर होगा। एक ही परिसर में आधुनिक सुविधाओं के साथ काम करने से फाइल मूवमेंट, बैठकों और समन्वय से जुड़े कार्यों में तेजी आएगी।
पर्यावरण के अनुकूल भवन
‘सेवा तीर्थ’ परिसर को पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन किया गया है। यहां ऊर्जा बचत, जल संरक्षण और हरित तकनीक का विशेष ध्यान रखा गया है। सोलर एनर्जी, वर्षा जल संचयन और ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग इस परिसर को ग्रीन बिल्डिंग की श्रेणी में लाता है।
सरकार लंबे समय से सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देती रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय का इस तरह के ग्रीन परिसर में स्थानांतरण इस नीति को व्यवहार में उतारने का उदाहरण माना जा रहा है।

शासन में सुधार की दिशा में कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बीते वर्षों में शासन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक-सक्षम बनाने पर जोर दिया है। ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में PMO का शिफ्ट होना इसी सोच का विस्तार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि देश के अन्य सरकारी कार्यालयों के लिए भी एक मॉडल तैयार होगा। आने वाले समय में अन्य महत्वपूर्ण कार्यालयों में भी इसी तरह के आधुनिक और सेवा-केंद्रित ढांचे को अपनाया जा सकता है।
क्या बदलेगा आम जनता के लिए
हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय का स्थानांतरण एक प्रशासनिक निर्णय है, लेकिन इसके दूरगामी प्रभाव आम जनता तक पहुंचेंगे। बेहतर समन्वय और तेज निर्णय प्रक्रिया का सीधा असर सरकारी योजनाओं और नीतियों के क्रियान्वयन पर पड़ेगा। इससे जनहित से जुड़े फैसले और अधिक प्रभावी तरीके से लागू हो सकेंगे।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में नए कार्यालय से कामकाज शुरू करना प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में शासन व्यवस्था को नई गति देने वाला साबित हो सकता है।

