By: Vikash Kumar (Vicky)
जनवरी 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत आज श्रद्धा और आस्था के साथ रखा जा रहा है। यह प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण शुक्र प्रदोष कहलाता है, जिसका विशेष महत्व बताया गया है। शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है, सौभाग्य में वृद्धि होती है और धन-संपदा का योग बनता है। खास तौर पर महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है।

शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
प्रदोष व्रत हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जब यह व्रत शुक्रवार को पड़ता है, तब इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है। शुक्रवार माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह से जुड़ा माना जाता है, इसलिए शुक्र प्रदोष व्रत को सुख-समृद्धि, वैभव और दांपत्य जीवन की मजबूती से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

जनवरी के आखिरी प्रदोष व्रत का विशेष संयोग
आज जनवरी महीने का अंतिम प्रदोष व्रत होने के कारण इसका महत्व और बढ़ गया है। वर्ष की शुरुआत में इस व्रत को रखने से पूरे साल शिव कृपा बनी रहने की मान्यता है। जो जातक लंबे समय से आर्थिक परेशानियों, वैवाहिक तनाव या मानसिक अशांति से गुजर रहे हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष लाभकारी माना जाता है।

प्रदोष काल और शुभ मुहूर्त का महत्व
प्रदोष व्रत में प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है। सूर्यास्त के बाद का समय प्रदोष काल कहलाता है। इसी समय भगवान शिव की पूजा करने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है। पंचांग के अनुसार इस काल में की गई पूजा जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता लाती है। पूजा के दौरान शांत मन और श्रद्धा के साथ मंत्र जाप करने से शीघ्र फल मिलने की मान्यता है।

शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा विधि
शुक्र प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें और दिनभर सात्विक आहार का पालन करें। शाम के समय प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करें। जल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करना शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती को बेलपत्र, सफेद फूल और धूप-दीप अर्पित करें। ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें। पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें।

शुक्र प्रदोष व्रत से मिलने वाले लाभ
मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है। अविवाहित लोगों के विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही मानसिक तनाव कम होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
कुल मिलाकर, जनवरी 2026 का आखिरी शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा पाने का उत्तम अवसर माना जा रहा है। विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों पर आधारित सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसका उद्देश्य किसी प्रकार का दावा करना नहीं है। व्रत या पूजा से संबंधित नियम स्थान, परंपरा और व्यक्तिगत आस्था के अनुसार अलग हो सकते हैं।

